Friday, June 2, 2017

ब्लाग लेखन के सात वर्ष ------ विजय राजबली माथुर

  





सात वर्ष पूर्व आज ही के दिन इस 'क्रांतिस्वर ' ब्लाग को प्रारम्भ किया था। 1973 में पहली बार आगरा और मेरठ के स्थानीय अखबारों में मेरे लेख प्रकाशित हुये थे तब से जब तब अखबारों में लेख छपते रहे हैं। आगरा के 'सप्तदिवा ' साप्ताहिक से पहले सहायक फिर उप संपादक के रूप में भी सम्बद्ध रहा । आगरा के ही त्रैमासिक 'अग्रमंत्र ' से भी उप संपादक के रूप में सम्बद्ध रहा। आगरा के ही एक साप्ताहिक 'ब्रह्मपुत्र समाचार ' से भी एक लेखक के तौर पर सम्बद्ध रहा हूँ। आगरा में ही कायस्थ सभा और माथुर सभा की मेगजीन्स में भी मेरे लेख स्थान  पा सके हैं। लखनऊ आने पर भी एक स्थानीय  साप्ताहिक अखबार में लेख छ्पे लेकिन 02 जून 2010 से यह ब्लाग प्रारम्भ होने पर अखबारों को लेख न भेज कर ब्लाग पोस्ट्स के माध्यम से लिखने लगा और अब 'विद्रोही स्व-स्वर में ', 'कलम और कुदाल ', 'साम्यवाद (COMMUNIST)', 'सर्वे भवन्तु सुखिना :','सुर संगीत ' ब्लाग्स में लेखन चलता रहता है।  
'क्रांतिस्वर ' ब्लाग में इससे पूर्व 485 पोस्ट्स प्रकाशित हो चुकी हैं और अब तक 180327 विजिट्स हुई हैं । दूसरे विषयों पर दूसरे ब्लाग्स में लेखन के कारण इस ब्लाग पर लेखन अब कम हो रहा है। विचारों को लिखते रहना मेरा शौक है इसलिए लेखन चल रहा है। सबके सहयोग के लिए सबको धन्यवाद। 
~विजय राजबली माथुर ©

1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (04-06-2017) को
"प्रश्न खड़ा लाचार" (चर्चा अंक-2640)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक