Tuesday, March 22, 2016

वे अपनी बात बंदूक के बल पर मनवाना चाहते हैं ------ जितेंद्र वर्मा



कुछ लोगों के लिए देशप्रेम का मतलब कोयल की कूक , नदियों का कलकल - छलछल , झरना का झर- झर , सूर्योदय, सूर्यास्त , पहाड, अतीत का झूठा महिमामंडन आदि है और भूख ,शिक्षा ,स्वस्थ, बराबरी, न्याय ,शोषण -मुक्ति ,अवसर की समानता जैसे मुद्दों का मतलब देशद्रोह है l इन मुद्दों पर से ध्यान हटाने के लिए जोर - जोर से चिल्लाना उनके लिए देशप्रेम है l 


Jitendra Verma

जेएनयू संकट : संकट की आहट
हाल में जेएनयू के घटना – क्रम ने पूरे देश को उद्धेलित किया है l विदेश में भी भारत की छवि बदरंग हुई है l यह विश्वविद्यालय अपने स्थापना काल से बहस , नए विचार , तर्क आदि का केंद्र रहा है l 
जेएनू का ताजा प्रकरण छात्र – संघ के अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी से शुरू हुआ l उनपर आरोप था कि उन्होंने अपने भाषण में काश्मीर की आजादी के और अफजल के पक्ष में नारा लगाया था l भाषण के विडीयो रेकार्डिग के जांच में यह आरोप गलत साबित हुआ l इसी आधार पर कन्हैया को जमानत मिली l 
इस विवाद में एक तरफ भारत सरकार है तो दुसरी तरफ जेएनयू के छात्र हैं l जबसे केंद्र में मोदी सरकार बनी है तबसे भाजपा जेएनयू के खिलाफ बोल रहें हैं l पिछले दिनों भाजपा के मुख – पत्र पाचजन्य और ऑर्गनाइजर में एक रिपोर्ट छपी जिसमें कहा गया कि जेएनयू में देशद्रोही पैदा होते हैं , वह देशद्रोहियों का अड्डा है l आज इस विश्वविद्यालय से निकले लगभग छ हजार आई ए एस , आई पी एस देश में कार्यरत हैं l बिहार के वर्तमान मुख्य सचिव इसी विश्वविद्यालय की उपज हैं l तो यह मान लिया जाय कि अभी देश को देशद्रोही चला रहें हैं ! 
जेएनयू शुरू से नए विचारों का केंद्र रहा है l वहाँ नए विचारों को पूर्वग्रह मुक्त नजरिये से देखा जाता है l ऐसा नहीं है कि वहाँ सिर्फ वामपंथी विचारों के अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है l वहाँ हर कोई अपना विचार रख सकता है l भाजपा के विधार्थी परिषद की शाखा वहां काम कर रही है , छात्र – संघ के चुनाव में कई पदों पर उसके उम्मीदवार जीते भी हैं l कांग्रेस के शासनकाल में( 22 दिसम्बर 1966) स्थापित यह विश्वविद्यालय वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है l यह अन्य विश्वविद्यालयों से थोडा भिन्न है l यहाँ नोकरी के लिए पड़ना अच्छा नहीं माना जाता है l यहाँ का लक्ष्य ज्ञान प्राप्त करना माना गया है l इंग्लैंड का कैम्बिज और अमेरिका का हार्वड इसके आदर्श हैं l ऐसे विश्वविद्यालय का नाम जवाहरलाल नेहरु के नाम पर होना स्वाभाविक है l यह मानविकी , समाज विज्ञान , अन्तरराष्ट्रीय अध्धयन में उच्चस्तरीय शिक्षा एवं शोध के लिए बना है l 
चिन्तन की प्रक्रिया आग्रह मुक्त होती है l किसी भी विचार , सिद्धांत , धारणा ,मान्यता आदि पर प्रश्नचिन्ह लगाना नए चिन्तन की पहली शर्त होती है l पहले के विचार , सिद्धांत , धारणा , मान्यता आदि का परीक्षण बुरा नहीं होता है l पर कमजोर विचार  वार्लों को हरदम डर बना रहता है कि कही उनकी पोल खुल नहीं जाए l वे अपनी बात बंदूक के बल पर मनवाना चाहते हैं l जेएनयू में किसी भी मुद्दे पर बहस , विचार – विमर्श की पर्याप्त जगह रहती है पर ठस दिमागवालों को थोड़ी भी मतभिन्नता , असहमति बर्दाश्त नहीं होती है l
कुछ लोगों के लिए देशप्रेम का मतलब कोयल की कूक , नदियों का कलकल - छलछल , झरना का झर- झर , सूर्योदय, सूर्यास्त , पहाड, अतीत का झूठा महिमामंडन आदि है और भूख ,शिक्षा ,स्वस्थ, बराबरी, न्याय ,शोषण -मुक्ति ,अवसर की समानता जैसे मुद्दों का मतलब देशद्रोह है l इन मुद्दों पर से ध्यान हटाने के लिए जोर - जोर से चिल्लाना उनके लिए देशप्रेम है l 
जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के बहाने जो घटनाएँ घट रहीं है उससे साफ़ है कि आज देश में भाजपा . आर . एस . एस . से असहमति , मतान्तर के लिए कोई जगह नहीं है l भाजपा और आर . एस . एस . से असहमति का एकमात्र अर्थ देशद्रोह है l यह विडम्बना ही है कि जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में अंग्रेजो का साथ दिया , गाँधी जी की हत्या की , राष्ट्रध्वज , राष्ट्रगीत को हरदम बदलने की मांग की वे आज देशभक्ति का प्रमाण पत्र बाँट रहें हैं ! 

जेएनयू के खिलाफ एक आरोप यह लगाया जा रहा है कि वहाँ के छात्र करदाताओं के पैसे से ऐयाश्शी करते हैं l ऐसे लोगों को शिक्षा पर होने वाला व्यय बेकार लगता है l यही वजह है कि मोदी सरकार अपने बजट में शिक्षा के व्यय पर कटैती कर रही है l भाजपा के विधायक ने बड़े परिश्रम से गिना कर बताया कि जेएनयू में प्रतिदिन कितने कंडोम , कितने शराब की बोतल , कितने सिगरेट के टुकडे , कितने मुर्गे की हड्डी , कितने मुर्गी की हड्डी मिलते हैं ! इस विश्वविद्यालय की व्यवस्था हरदम रफ एंड टफ रही है l कैंटीन में ग्लास नहीं रहता , सभी जग से ही पानी पीते हैं l जींस और कुर्ता यहाँ का सदाबहार ड्रेस है l यहाँ के छात्र रात – रात भर पढने के लिए जाने जाते हैं l ऐसी जगह पर सेना को तैनात करना शर्मनाक है l भारत इतना कमजोर नहीं है कि किसी के कहने या भाषण से टूट जाएगा l

Jitendra Verma


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 ~विजय राजबली माथुर ©
 इस पोस्ट को यहाँ भी पढ़ा जा सकता है।

1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (23-03-2016) को "होली आयी है" (चर्चा अंक - 2290) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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रंगों के महापर्व होली की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'