Wednesday, May 11, 2016

कन्हैया से घबराता है कौन - कौन ? ------ संतोष सिंह


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कन्हैया से जितने बीजेपी घबरायी हुई है उतना ही जाति की राजनीत करने वाले मायावती ,, मुलायम और लालू भी है यही वजह है कि मयावती भी कन्हैया की जाति को ज्यादा फोकस कर रही है वही लालू प्रसाद भी कन्हैया से मुलाकात के बाद पहला लाईन यही थी ब्रह्मर्शी का बेटा है ॥














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Santosh Singh 
May 3 at 12:16pm · 
इन दिनों समर ट्रेनिंग का दौर चल रहा है हमारे यहाँ भी वीमेंस कॉलेज पटना और पटना कॉलेज से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे छात्र छात्राए ट्रेनिंग के लिए आयी हई है ॥
शराब बंदी का क्या प्रभाव पड़ा इस पर स्टडी करने के लिए एक ग्रुप पटना संग्रहालय के पीछे स्थित स्लम
बस्ती में गयी थी ॥
दो दिनों के स्टडी के बाद कल वो ऑफिस आयी और उसके बाद अपने अनुभव के बारे में बताना शुरू कि,,,
इस दौरान शराब बंदी को लेकर कई ऐसी बाते बतायी जो हमारे जैसे पत्रकार जो अक्सर ये दंभ भरते हैं कि समाज के सोच को काफी करीब से देखते और समझते हैं हैरान रह गया खैर बात आगे बढ़ी इसी दौरान एक ट्रेनी बतायी सर उस सल्म वस्ती में एक टेम्पू वाला मिला दोपहर के समय में सिर्फ महिलाये ही थी शायद ये खाना खाने आया हुआ था उस वक्त उसी कि पत्नी के साथ हमलोग बात कर रहे थे उन्होंने पुछा आपलोग क्या करती हैं मैने बताया पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं तो उसने झट से 
पुछा कल पटना में कौन आ २हा है,,हमलोग आपस में एक दूसरे को देखने लगे ,,,बताईए बताईए कौन आ २हा है ,,, मैंने धीरे से कहा कन्हैया की बात कर रहे हैं जोड़ से हंसते हुए कहा कि हा कल हम सब लोग उसका भाषण सूनने जा रहे हैं देखते हैं क्या बोलता है,,, फिर इन लोगो ने कन्हैया को लेकर बाते कि वहाँ मौजूद सारी महिलाये कन्हैया को जान रही थी और कह रही थी गरीब का बेटा है इंसाफ का मांग किया तो जेल डाल दिया.,,
मैं तो हैरान २ह गया कन्हैया की पहुंच देश के अंतिम व्यक्ति तक ॥फिर मैं इन लड़कियों से बात करना शुरू किया इन्होंने कहा हमारे कैम्पस में वामपंथी और विद्यार्थी परिषद छात्र संगठन मौजूद है और इन दोनों संगठन से छात्र जुड़े हुए हैं लेकिन अधिकांश वैसे छात्र जो किसी भी संगठन से जुड़ा हुआ नही है वो सभी कन्हैया के साथ है ॥
मेरा दूसरा सवाल था कन्हैया में क्या खास है  ?
सर इस भी़ड़ से अलग है बात में दम है काफी सरलता से हंसते हुए वो बाते कह देता है जिसे समझने के लिए बड़ा दिमाग चाहिए ॥
अच्छा ऐसा है  ?
और सर वो आजादी वाला नारा क्या कहना है दिल झुम उठता है ॥ मुख्यमंत्री का जनता दरबार में भी जाना था लेकिन इन ट्रेंनी की बात सुनते सुनते काफी लेट हो तभी खबर आयी कि सीएम पर किसी ने चप्पल फेंक दिया ॥ भागते हुए सीएम हाउस पहुँचे थोड़ी देर मामला शांत और फिर आराम से बैठने के लिए सोच ही रहे थे तभी किसी ने पास आकर कहा साहब बुला रहे है॥ जैसे ही उस और मुखातिव हुआ आवाज आयी आईए आईए संतोष जी पहुॅचे तो वहाँ भी कन्हैया पर ही चर्चा हो रही थे ॥ उस डेस पर कमीशनर और आईजी रैंक के कई अधिकारी बैंठे थे इसमें से कई ऐसे पदाधिकारी थे जिनसे मेरा कोई परिचय नही था ॥
परिचय के बाद सीधा सवाल हुआ कन्हैया को लेक२ आप क्या सोचते हैं  ?मैने ट्रेनी छात्रा के अनुभव को सूना दिया और उसके बाद बहस और तेज हो गयी और इसी दौरान एक अधिकारी ने शराब को लेकर दिये गये बयान का हवाला देते हुए कहा कि कन्हैया नीतीश नराज हो जाये इसका चिंता किये बगैर डेमोक्रेसी के लारजर कान्टेस्ट में अपनी बात को रखा ॥
ये दो उदाहरण कन्हैया को समझने के लिए काफी है और यही वजह है कन्हैया से जितने बीजेपी घबरायी हुई है उतना ही जाति की राजनीत करने वाले मायावती ,, मुलायम और लालू भी है यही वजह है कि मयावती भी कन्हैया की जाति को ज्यादा फोकस कर रही है वही लालू प्रसाद भी कन्हैया से मुलाकात के बाद पहला लाईन यही थी ब्रह्मर्शी का बेटा है ॥

https://www.facebook.com/santoshsingh.etv/posts/1065194023519721

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  ~विजय राजबली माथुर ©
 इस पोस्ट को यहाँ भी पढ़ा जा सकता है।

2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (13-05-2016) को "कुछ कहने के लिये एक चेहरा होना जरूरी" (चर्चा अंक-2341) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

JEEWANTIPS said...

सुन्दर व सार्थक रचना प्रस्तुतिकरण के लिए आभार!

मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...