Thursday, March 9, 2017

विज्ञान पर आधारित प्राच्य भारतीय ज्ञान ------ विजय राजबली माथुर

  
हिंदुस्तान, लखनऊ, 09 मार्च 2017 , पृष्ठ --- 14
 हिंदुस्तान,लखनऊ, 04-03-2017, पृष्ठ -8 


हमारे देश में कुछ वैज्ञानिक, साईंसदान, एथीस्ट और यूरोप का गुणगान करने वाले वामपंथी लोग यह मानते हैं कि, 'वेद ' गड़रियों के गीत हैं और भारत विज्ञान से अछूता देश था । के एम एम हाईस्कूल, सिलीगुड़ी में हमारे साईन्स अध्यापक  श्री जुगल किशोर मिश्रा ( निवासी घुंडी गली, कानपुर ) तो 1965 में बड़े दावे के साथ कहा करते थे कि, भारत में साईन्स यूरोप से आई है यहाँ तो केवल पहाड़े ईजाद हुये थे। अब प्रोफेसर डी एस चौहान साहब ने विज्ञान कान्फरेंस में यह स्वीकार किया है कि, '' सबसे पहले भारत में हुई विज्ञान की उत्पत्ति " । 
हिंदुस्तान, लखनऊ, 09 मार्च 2017 , पृष्ठ --- 14 पर प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि, " पहाड़ों पर अगले तीन दिन बारिश - बर्फबारी " लेकिन नीमच के 'चंड - मार्तंड ' पंचांग ने जो बहुत पहले ही प्रकाशित हो चुका था के पृष्ठ 54 और 55 पर 11 फरवरी से 12 मार्च 2017 और आगे  के विषय में स्पष्ट लिख दिया था :
* षडाश्टकी गुरु भौम की, सम  सप्तक गुरु -शुक्र।  
   ऋतु विषम से आपदा, मेघ गाज नव चक्र ॥  
* युति योग भृगु भौम का, राशि मीन प्रसंग। 
   बैंक कोश मुद्रा विषय, शासन नव्य  तरंग॥ 
*  चक्रवात वायु प्रबल, सांसारिक गतिचार। 
   ऋतु विषय से आपदा,  जन धन क्षति प्रहार॥ 
*  पूनम फागुन मास की, मेघ गाज गति लक्ष। 
    भावी तेजी मानिए, गल्ला धान के पक्ष ॥ 
*  फागुन में बादल बनें, किन्तु न बरसे नीर। 
    तो फिर वर्षा काल में, वर्षा बने प्रवीर॥ 
अर्थात 20 जनवरी से 28 फरवरी तक शुक्र और मंगल के  'मीन ' राशि में एक रहने एवं  27 जनवरी से गुरु 'मीन ' राशि में प्रविष्ट हो कर 'कन्या ' के गुरु के साथ 180 डिग्री का कोण बनाने वाले इन योगों  के परिणाम स्वरूप बैंकों के नए चार्ज वसूली के फरमान सामने आए ।पहाड़ों पर बर्फबारी हुई। 07 मार्च को पटना में और 09 मार्च को दिल्ली में  भी बारिश हुई एवं होली से पूर्व लखनऊ में भी बारिश की उम्मीद 'मौसम विभाग ' जता ही चुका है। 
इसके अतिरिक्त आगामी पूर्णिमा 12 मार्च,2017 को यदि बादल गरजते हैं तो निश्चित है कि, गल्ला ( गेंहू, धान ) मंहगा होगा। यदि फागुन माह में सिर्फ बादल बन कर रह जाते और बरसते नहीं तब तो आगामी वर्षा काल मे प्रचुर वर्षा होने की संभावना रहती। परंतु अब पहाड़ों के साथ - साथ ही गंगा - यमुना के दोआबे में भी बारिश हो गई है अतः वर्षा ऋतु में पर्याप्त वर्षा होने की संभावना समाप्त हो गई है। यदि भारतीय ज्योतिष विज्ञान के आंकलन ( पुजारियों / पोंगा पंडितों की कल्पना नहीं ) को ध्यान रख कर आर्थिक व जन कलयांणकारी योजनाएँ बनाई जाएँ तब इन संकटों पर निजात पाई जा सकती है। अन्यथा त्राहि - त्राहि व जन असंतोष व आंदोलनों का सामना करना ही पड़ेगा। 
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10 मार्च 2017 : 
9/10 तारीख की रात्रि में हल्की ही सही बारिश लखनऊ में भी हो ही गई तथा 10 की प्रातः आंधी के बाद 'ठंड' का एहसास भी होने ही लगा। मौसम विभाग को भी कहना ही पड़ा जिसे पंचांग में काफी पहले ही स्पष्ट कहा गया था। 







~विजय राजबली माथुर ©

1 comment:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (12-03-2017) को
"आओजम कर खेलें होली" (चर्चा अंक-2604)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक