Sunday, March 13, 2011

जो होना है सो होना फिर क्यों रोना है?

मारे देश में यह एक आम प्रवृत्ति हो गयी है कि जब किसी बात की चेतावनी दी जाए या पहले से आगाह किया जाये तो लोगों का लगभग एक सा जवाब होता है कि जो होना है सो होकर रहेगा हम क्यों अपने चैन में खलल डालें.हमें आज तो मौज उड़ा लेने दो,कल किसने देखा है?बचाव और राहत की अग्रिम तैय्यारी करने का तो सवाल ही नहीं उठता.अभी स्वयं वैज्ञानिकों के एक वर्ग ने १९ मार्च २०११ शनिवार ,पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा के पृथ्वी की कक्षा से निकटतम दूरी पर परिभ्रमण करने को अनिष्ट सूचक बता दिया तो वैज्ञानिकों का दूसरा वर्ग और कुछ ज्योतिषी भी उसका खंडन करने को उचक कर आगे आ गए.जब जापान की सुनामी जैसी कोई आपदा घटित हो जाती है तब घडियाली आंसू बहाने को सभी खड़े हो जाते हैं.आइये एक नज़र अंतरिक्ष में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति पर डालें-
  1. फाल्गुन कृष्ण षष्ठी बुधवार २३ फरवरी को स्वाति नक्षत्र था  जो भविष्य में दुर्भिक्ष का सूचक है अर्थात फसलों की हानि का संकेत देरहा है.अतः गोदामों तथा परिवहन में अग्नि,वर्षा आदि से अन्न की सुरक्षा के बंदोबस्त किये जाने चाहिए.
  2. १९ मार्च शनिवार के दिन गुरु और शनि ग्रह १८० डिग्री पर होंगे एवं रात्री के समय चन्द्रमा भी शनि के साथ कन्या राशि में होगा जबकि गुरु जल राशि  मीन में होगा.इस स्थिति का परिणाम जल या जल क्षेत्रों में उथल पुथल जो सुनामी ,भूकंप या मानव जनित विस्फोट कुछ भी हो सकता है.दैनिक उपभोग की वस्तुओं में कमी तथा गृहणियों पर प्रहार भी संभावित है.जनता में असंतोष भडकेगा और अनावश्यक खर्च बढ़ेंगे न्याय और अर्थव्यस्था में भी संकट हो सकता है.
  3. सूर्य भी मीन राशि में रह कर शनि से १८० डिग्री पर ही होगा जिसके प्रभाव से पुलिस ,सेना और मजदूर वर्ग में टकराव के संकेत भी हैं.सरकारी कर्मचारियों में असंतोष से शासन कार्यों में बाधा आ सकती है.
  4. मंगल कुम्भ राशि में होने से शनि के साथ षडाष्टक योग रहेगा.परिणामतः सांसदों ,विधायकों पर आपदा आ सकती है.यातायात मार्ग दुर्घटनाएं ,यान और खान दुर्घटनाओं से भी जन धन की क्षति संभावित है.
  5. केतु मिथुन राशि में तथा राहू धनु राशि में रहेगा जिसका स्वामी गुरु है .परिणामतः महापुरुषों पर भार या मारक प्रभाव पड़ सकता है.जनता के मध्य संक्रामक रोग फैलने का भी योग है.
ये सारी घटनाएं पूर्णिमा से पूर्व और बाद में कभी भी घटित हो सकती हैं केवल मात्र उसी दिन ही नहीं.अतः सतत सावधानी रखने की आवश्यकता होगी.

मेरे विचार में तात्कालिक उपायों के रूप में चन्द्र ग्रह की शांति करना चाहिए.अब इतने कम समय में उपचार हो सकेगा अथवा नहीं यह तो नहीं कहा जा सकता.फिर भी प्रयास करना मनुष्य का कर्तव्य है.प्रकोप में कुछ तो कमी हो ही सकती है.'ॐ सोम सोमाय नमः' मन्त्र से ११००० जाप न्यूनतम होना चाहिए.अर्थात प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने लिए प्रति दिन २००० बार जाप करें.जाप पूर्ण होने पर ११०० आहुतियाँ 'ॐ सोम सोमाय स्वाहा 'मन्त्र से सामग्री में चावल और बूरा मिला कर दें.व्यक्तिगत बचाव हेतु पूर्णिमा के दिन उपवास रखा जा सकता है.अर्थात पूर्णिमा की रात्री में भोजन न करें और सूर्यास्त के बाद पानी कतई न पीयें.शरीर विज्ञानं कहता है -मानव शरीर का ८० प्रतिशत भाग जल ही है.पूर्णिमा के दिन समुद्र तक में ज्वार आ जाता है तो मानव शरीर में भी रक्त में मिले जल में ज्वार होने के कारण सर दर्द -मृगी -बुखार-पागलपन-अपराध प्रवृति आदि बढ़ जाते हैं .इसलिए रात्री में जल का निषेद्ध है परन्तु हमारे पोंगा-पंथी उल्टा करवाते हैं.वे लोगों को दिन भर भूंका-प्यासा रख कर रात्री में चन्द्र को जल का अर्क चढ़वाकर सम्पूर्ण भोजन -पानी खाने को कहते है.यह सर्वथा वैज्ञानिक रूप से बिलकुल गलत है.बल्कि दिन में एक ही समय भोजन करना चाहिए वह भी मीठा या फीका ही.नमक का पूर्ण निषेद्ध रखना चाहिए.हवन सामूहिक रूप से भी किया जा सकता है.

हवन द्वारा उसमें डाली गयी आहुतियों को अग्नि परमाणुओं में विभक्त कर देती है और वायु उन परमाणुओं को बोले गए मन्त्रों की शक्ति से सम्बंधित ग्रह-नक्षत्रों तक पहुंचा देती है.साथ ही साथ मन्त्र उच्चारण में वायेब्रेशन की प्रक्रिया भी उस ग्रह -नक्षत्र  को प्रभावित करती है.इसलिए यही वैज्ञानिक और श्रेष्ठ पद्धति है न कि अन्य ढोंग के उपाए.

पोंगा-पंथी महानुभाव इस वैज्ञानिक समाधान की खिल्ली जरूर उड़ायेंगे.वे तो दान पुन्य का राग अलाप कर भोली जनता को उलटे उस्तरे से मूढ्ना जानते हैं;जनता को राहत पहुंचाना उनका उद्देश्य कभी नहीं होता है.सर्वजन हित को लक्ष्य कर मैंने उपरोक्त सुझाव देकर बेवकूफी का काम कर दिया है.मानना या न मानना लोगों की अपनी -अपनी मर्जी है.

आत्म विशवास और मनोबल को ऊंचा रख कर हर समस्या का समाधान सहजता से किया जा सकता है.मैं तो यही मानता हूँ.

आओ मिल कर विचार करें  हम आप अपना सुधार करें.
धरा पर वृक्ष लगायें  आप हम  अपना बचाव करें.
आओ मिल कर विचार करें  हम भी ऐसे काम करें .
सूरज की तरह चमकें   मानवता का उपकार करें..

11 comments:

अल्पना वर्मा said...

आप के विचारों से सहमत.
बहतु अच्छा लेख .

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

माथुर साहब, लैपटॉप की समस्या और समयाभाव के कारण बहुत कुछ छूट गया.. आशा है क्षमा करेंगे.. आज का विश्लेषण भी गजब का है!!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

आत्म विशवास और मनोबल को ऊंचा रख कर हर समस्या का समाधान सहजता से किया जा सकता है.मैं तो यही मानता हूँ.
आपकी हर पोस्ट विचारणीय होती है.... इन सार्थक विचारो के लिए आभार

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

"मंगल कुम्भ राशि में होने से शनि के साथ षडाष्टक योग रहेगा.परिणामतः सांसदों ,विधायकों पर आपदा आ सकती है"

काश !

निर्मला कपिला said...

संयम आत्मविश्वास पूजा पाठ -- अगर हम इनकी अहमियत को समझ कर चलें तो शायद प्रकृ्ति के साथ अन्याय न कर सकें और न ही ऐसी विपदायें आयें। लेकिन उसके आगे किस की चलती है। भोगना तो पडेगा ही। बहुत अच्छी जानकारी है। धन्यवाद।

nivedita said...

विचारणीय आलेख ।

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

आद. विजय जी,
आपके पोस्ट से हमेशा तथ्यपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है !
इस बार भी आपके सुझाव और ज्ञानपूर्ण जानकारियां अमल में लाने योग्य हैं !
आपका बहुत बहुत आभार !

डॉ टी एस दराल said...

आत्म विशवास और मनोबल को ऊंचा रख कर हर समस्या का समाधान सहजता से किया जा सकता है।
बहुत सही कहा है ।
जानकारीपूर्ण लेख । आभार ।

krati bajpai said...

नमस्ते सर ,

एक विशुद्ध भारतीय होने के कारण मेरा ज्योतिष और विज्ञानं दोनों पर ही पूरा विश्वास है | आपका ब्लॉग यक़ीनन ज्योतिष में रूचि रखने वालों का लगातार ज्ञान बढ़ा रहा है | एक बार फिर जानकारी बढ़ाने के लिए धन्यवाद |

Rajesh Kumar 'Nachiketa' said...

बढ़िया व्याख्या थी...उपाय जितना संभव हो करना ही चाहिए...

Patali-The-Village said...

बहुत सही कहा है| बहुत अच्छी जानकारी धन्यवाद।