Tuesday, May 31, 2011

जीवन-स्वास्थ्य-मृत्यु के ज्योतिषीय चिन्ह (भाग २ )

पिछले अंक में जीवन-रेखा पर स्वास्थ्य और मृत्यु के सम्बन्ध  पाए जाने वाले  चिन्हों से परिचित कराया था. उसी कड़ी में पहले कीरो साहब की ही चर्चा करते हैं.कीरो साहब सम्राट एडवर्ड,ब्रसेल्स के सम्राट लियोपोल्ट,रूस के सम्राट आदि को सफलता पूर्वक आगाह कर चुके थे जिनकी चर्चा अखबारों में हुई थी. अतः इटली के सहज एवं व्यवहारिक सम्राट हम्बर्ट जिनकी ह्त्या करने की एक असफल कोशिश पहले हो चुकी थी ने कीरो साहब को अपने महल में बुलाया था.उनकी रानी भी सुन्दर व शालीन थीं.

सम्राट हम्बर्ट की हथेली में जीवन -रेखा एक स्थान पर टूटी हुयी थी जिससे गणना करके कीरो साहब इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इटली के सम्राट का जीवन एक खतरनाक घड़ी में प्रवेश कर चुका है.शनि के चरम दुष्ट प्रभाव के मद्देनजर उन्होंने सम्राट को चेतावनी दे दी कि वह इधर-उधर जाते समय पूरी सावधानी बरतें,जहाँ तक संभव हो यात्राएं न करें और लोगों में कम से कम दिखाई दें.वह इस पर हंसने लगे-"कीरो,आप द्वारा दी गयी चेतावनी के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद .कुछ समय से मैं यह बात जानता हूँ कि एक व्यक्ति के रूप में मुझे मौत की सजा सुनाई जा चुकी है."कीरो कहते हैं उन्होंने लापरवाही से अपने कन्धों को झटका और कहा-"मेरे लिए अपनी जनता की भलाई सबसे पहले है."



मुश्किल से तीन माह हुए होंगें कीरो पेरिस गए थे जहाँ उन्हें दुखद समाचार मिला कि अपनी गाडी में जाते हुए हम्बर्ट की एक आतंकवादी ने ह्त्या कर दी. अखबार कीरो द्वारा दी गयी चेतावनियों से भरे पड़े थे परन्तु इटली का बहादुर सम्राट अपनी टूटी जीवन-रेखा के कारण जिन्दगी से टूट गया.

कीरो की अन्य चेतावनियाँ-

यदि जीवन-रेखा बाईं हथेली में टूटी हुयी हो लेकिन दायीं हथेली में जुडी हुयी हो तो यह किसी खतरनाक बीमारी और संभावित मृत्यु से बाल-बाल बच निकलने की और संकेत करती है.

कभी-कभी एक दोहरी जीवन-रेखा देखने को मिलती है .इस भीतरी रेखा को मंगल -रेखा कहते हैं .यह प्रबल शक्ति का प्रतीक है.ऐसी रेखा शारीरिक रूप से बलिष्ठ उद्यम करने की अपार क्षमता वाले लोगों में होती है ;विश्व के कुछ जाने-माने उद्योगपतियों की हथेली में यह दोहरी जीवन-रेखा बहुत ही स्पष्ट रूप से देखने में आयी है.

यदि यह मंगल रेखा टूटी हुयी जीवन-रेखा के पीछे चलती हुयी दिखाई दे तो बिसका अर्थ है कि चाहे जीवन में कितनी भी बड़ी बीमारियाँ या दुर्घटनाएं घटित  क्यों न हों जाएँ-उस व्यक्ति का जीवन चलता रहता है.

जब मंगल-रेखा की एक शाखा जीवन-रेखा को लांघ कर हथेली के दूसरी तरफ निकल जाती है तो यह खतरों की उग्रता व अनिश्चितताओं के प्रति सावधान करती है.जहाँ यह जीवन -रेखा को काटती है,वहां स्वंय यह मृत्यु के लिए एक  ख़तरा है. 

ध्यान रखने योग्य बात यह है कि एक चौड़ी -उथली रेखा एक स्वस्थ-बलिष्ठ शरीर का प्रतीक नहीं भी हो सकती है बल्कि यह उतना अच्छा लक्षण नहीं है.एक स्पष्ट,गहरी व पतली रेखा ही अच्छा लक्षण है.एक चौड़ी जीवन-रेखा का सम्बन्ध उन लोगों से होता है जिनमें पशुओं जैसा बाहुबल है.जबकि गहरी जीवन-रेखा उन लोगों में मिलती है जिनके पास मानसिक व इच्छाशक्ति अधिक है.तनाव व बीमारी की स्थिति में गहरी रेखा जम कर मुकाबला करती है जबकि चौड़ी दिखने वाली जीवन-रेखा में इतनी शक्ति नहीं होती.

बहुत चौड़ी रेखाएं इच्छाशक्ति की तुलना में शारीरिक शक्ति का प्रतीक अधिक हैं.यदि यह रेखा छोटे-छोटे टुकड़ों से जुड़ कर बनी हो तो स्वास्थ्य का प्रतीक है.कठोर हाथों में यही चिन्ह उतनी खराब स्थिति की और संकेत नहीं करते क्योंकि कठोर व मजबूत हाथ स्वंय में ही अच्छे शारीरिक गठन का प्रातीक हैं.

यदि जीवन-रेखा सीधी जाती हुयी शुक्र के उभार के किनारे की और जाती है और उस उभार को संकरा कर देती है तो यह एक कमजोर शारीरिक गठन का प्रातीक है.ऐसे व्यक्ति में पाशविक चुम्बकीय शक्ति भी कम होती है.

यदि जीवन-रेखा हथेली में कोई वक्र-रेखा या अर्धगोलाकार आकृति बनाती है तो इसे 'ग्रेट पायर आर्च' कहते हैं .यह रक्त को अंगूठे की जड़ तक पहुंचाती है और फिर उसे 'आर्च' की दूसरी तरफ जीवन-रेखा के नीचे ले जाने का काम करती है.

आमतौर पर यह देखा गया है कि वे लोग जो बहुत शीघ्र बीमार पड़  जाते है उनके  'पामर आव आर्च'का घेरा स्वस्थ लोगों की तुलना में काफी संक्रा होता है.
यही कारण है कि जब हथेली में शुक्र का उभार अधिक हो तो उसे कम बड़े उभार की तुलना में अत्यधिक कामवासना की प्रवृति का सूचक माना जाता है.

जब मस्तिष्क रेखा नीचे की और झुकती हुयी दिखाई दे तो यह शुक्र के गुणों की और संकेत करती है.(मस्तिष्क रेखा का उद्गम जीवन रेखा से ही होता है और यह हथेली में बीचों-बीच होती है) जैसे कि कल्पनाशील व रोमांटिक स्वभाव.इससे यह भी पता चलता है कि इन लोगों में उन लोगों की बनिस्बत जिनकी मस्तिष्क रेखा हथेली के आर-पार निकल जाती है ,प्रेम के चक्कर में जल्दी पड़ जाने की आदत अधिक होती है.

यदि जीवन-रेखा ब्रहस्पति के उभार की और काफी ऊंची उठती है तो वह व्यक्ति स्वंय पर काफी नियंत्रण रखता है और उसकी महत्वाकांक्षाएं उसके जीवन की दिशा तय करती हैं.यदि यह रेखा मंगल की रेखा के समीप हथेली पर काफी नीचे से निकलती हो तो ऐसे व्यक्ति का अपने मिजाज पर नियंत्रण कम होता है.यदि यह रेखा विशेषकर युवाओं में दिखाई दे तो ऐसा पाया गया है कि वे अधिक झगडालू,कम आज्ञाकारी और पढाई-लिखाई में अधिक महत्वाकांक्षी नहीं होते.

यूरोप में कीरो साहब के अनुसंधान से लोगों में जाग्रति आयी है परन्तु यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि अभी तक हमारे देश में ज्योतिष विशेषकर हस्त-रेखा विज्ञान को अंधविश्वासों से जोड़ कर देखा जाता है. गम्क्षा ओडे ,तिलक छाप पेटू लोगों ने अपने ओछे हथकंडों द्वारा इस विद्या का काफी सत्यानाश किया है.अफ़सोस है कि लोग ऐसे ही लोगों को पूजते भी हैं जबकि वास्तविक ज्ञान देने वाले को मूर्ख करार दे दिया जाता है और उसे उपेक्षित रखने हेतु भाँती-भाँती के जाल बुने जाते हैं.मैं स्वंय ऐसे ही चक्रव्यूहों का शिकार हूँ. परन्तु मेरा लक्ष्य चूंकि ढोंग-पाखण्ड का विनाश करना है इसलिए इस श्रंखला को चलाया है.

अंगूठा हथेली में मस्तिष्क का प्रतिनिधित्व करता है .अतः केवल अंगूठे का अध्यन मात्र किसी व्यक्ति की मानसिकता का सम्पूर्ण परिचय दे देता है.यदि आप देखें कि किसी व्यक्ति का अंगूठा पीछे की और काफी झुकता है तो समझ लें कि वह व्यक्ति अपने एक पैसे के फायदे के लिए दुसरे के सौ पैसों का भी नुक्सान कर सकता है.इसके विपरीत न झुकने वाले अंगूठे का व्यक्ति अपने सिद्धांतों एवं नीतियों की खातिर अपना बड़ा से बड़ा नुक्सान भी झेल जाता है.

हथेली में ऊपर की और बुद्ध की उंगली अर्थात कनिष्ठा के नीचे से प्रारंभ रेखा को ह्रदय-रेखा कहते हैं.इसकी उत्तम स्थिति तर्जनी और मध्यमा का विभाजन करने वाली है. परन्तु यदि किसी की हथेली में यह मध्यमा अर्थात शनि  की उंगली के नीचे ही समाप्त हो जाए तो समझें ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय है.उस पर विशवास करना धोखे को आमंत्रित करना है.

हथेली में पीले धब्बे अधिक दिखाई दें तो समझें कि उस व्यक्ति में लाल रक्त कणों की कमी है.उसे आयरन टेबलेट्स या हरे साग खाने की सलाह दें.हथेली में नसें चमकती दिखाई दें तो समझ लीजिये उस व्यक्ति का नर्वस -सिस्टम वीक है और वह बहुत जल्दी घबडा भी जाता होगा और क्षण भर में ही खुश भी हो जाता होगा.

हाथ की नाखूनों पर काले धब्बे स्वास्थ्य-हानि की सूचक हैं यदि ये छः माह रह जाएँ तो उस व्यक्ति की मृत्यु की पूर्व सूचना समझें.

यदि विवाह-रेखा से कोई पतली रेखा नीचे ह्रदय रेखा की और जाती दिखाई दे तो समझ लें उसके जीवन-साथी का जीवन समाप्त होने वाला है.

यह लेख-श्रंखला  लोगों को मायूस  करने के लिए नहीं बल्कि जागरूक करने के ध्येय से चलाई गयी थी. भविष्य में इस प्रकार के और भी प्रयास करेंगें.

6 comments:

krati said...

नमस्कार सर,
ज्योतिष में रूचि रखने वालों के लिए ये यक़ीनन बहुत ही मददगार पोस्ट साबित होगी | आगे भी इसी तरह की पोस्ट से हम सभी का मागदर्शन करते रहें |
धन्यवाद |

डॉ टी एस दराल said...

माथुर साहब , आज की पोस्ट हस्त रेखा विज्ञानं की दृष्टि से एक सम्पूर्ण पोस्ट है । बहुत सरल तरीके से आपने सभी रेखाओं के बारे में बताया है । अच्छा लगा जानकर ।

कुछ जिज्ञासाएं भी हैं ।

मैरिज लाइन दो क्यों दिखाई हैं ?
ट्रेवेल लाइन का होना क्या दर्शाता है ?
यदि जीवन रेखा टूटी हो , लेकिन भाग्य रेखा से जुडी हो तो इसका क्या अर्थ है ?

बहुत जानकारी परक और संग्रहणीय पोस्ट के लिए आभार ।

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

आद. माथुर जी,
बहुत ही उपयोगी और ज्ञानवर्धक पोस्ट है!
आभार !

Manpreet Kaur said...

बहुत ही अच्छी जानकारी!मेरे ब्लॉग पर जरुर आए ! आप दिन शुब हो !
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Shayari Dil Se

Vijai Mathur said...

डा .सा:
बहुत-बहुत धन्यवाद -आपकी जिज्ञासाओं के लिए.
१.यह चित्र गूगल से लिया है.इरादतन दो मेरिज लाइन नहीं दिखाईं थीं ,वैसे पहले के जमाने में जितनी लाइनें हों उतने विवाह कह देते थे,लेकिन आज कल इनका मतलब रेखाओं जितने संबंधों से है.जरूरी नहीं है उतने विवाह हो ही.
२.ये ट्रेवल लाइनें समुद्री यात्राओं का प्रतीक हैं जिसका अर्थ है ओवरसीज जर्नी जो हवाई मार्ग से भी हो सकती हैं.समुद्री मार्ग अपनाया जाये यह आज कल आवश्यक नहीं है.
३.जीवन रेखा टूटी हो ,लेकिन भाग्य रेखा से जुडी हो तो इसका तात्पर्य यह है -जीवन पर मरणान्तक कष्ट आ सकता है परन्तु प्रारब्ध या संचित भाग्यफल के कारण सद्प्रयास से उसका निवारण किया जा सकता है और बचाव हो सकता है.
मूल बात कर्म न छोड़ना है.जैसे धुप या वर्षा में हम छाता लेकर बचाव करते हैं उसी प्रकार हम जिंदगी में भी उपयुक्त बचाव करके जीवन को सुन्दर,सुखद और समृद्ध बना सकते हैं.

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

जानकारी परक और संग्रहणीय पोस्ट....धन्यवाद