Sunday, August 5, 2012

सीमा आज़ाद और उनके पति को रिहा किया जाये

सीमा आज़ाद के जन्मदिवस 05 अगस्त पर ---

हम सीमा आज़ाद को जन्मदिन की मुबारकवाद देते हैं और उनके सुखद,सुंदर,स्वस्थ,समृद्ध और उज्ज्वल पारिवारिक,सामाजिक,राजनीतिक भविष्य  एवं दीर्घायुष्य  की मंगलकामना तथा उनके और उनके पति की शीघ्र रिहाई की आशा करते हैं। 



 सीमा-विश्वविजय रिहाई मंच के द्वारा 19 जूलाई 2012 को जारी प्रेस नोट मे  अध्यक्ष की 04 जूलाई की प्रेस कान्फरेंस के हवाले से कहा गया है कि-
“पत्रकार सीमा आजाद और विश्वविजय के पास वास्तव में कोई माओवादी साहित्य था ही नहीं. पुलिस ने जो भी आपत्तिजनक साहित्य बरामद दिखाया, वह सब उन्हें झूठा फंसाने की उच्च-स्तरीय साज़िश के तहत फर्जी तरीके से दिखाया गया था.”

01 जूलाई को नैनी जेल मे मिलने गए प्रतिनिधिमंडल से  सीमा आजाद ने  कहा कि उनके पास कोई माओवादी साहित्य था ही नहीं. जो किताबें वह दिल्ली स्थित विश्व पुस्तक मेले से खरीद लायी थीं उनमें उम्दा किस्म की साहित्यिक रचनाएँ थीं. जिनकी सूची उन्होंने उक्त जेल मुलाकात के दौरान नोट भी करा दी।  इसी आधार पर उक्त प्रतिनिध-मंडल में शामिल ‘सीमा-विश्वविजय रिहाई मंच’ के तदर्थ अध्यक्ष जीपी मिश्र ने पत्रकार वार्ता में यह बयान दिया था।

हिमांशु कुमार जी ने अपने फेसबुक स्टेटस द्वारा जागरूक छात्रों, महिलाओं, मजदूरों, किसानों और लोकतंत्र-पसंद बुद्धिजीवियों से  UAPA और 121, 121A, 124A आईपीसी जैसे काले कानूनों के तहत तमाम बेक़सूर युवाओं, साहसी पत्रकारों एवं समर्पित सामाजिक कार्यकर्ताओं को फर्जी मुकदमों में फंसाये जाने के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए सीमा आज़ाद के जन्मदिन 05 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंत्र मे साँय 05 बजे एकत्र होने का आह्वान किया है।

हम जो लोग दिल्ली नहीं पहुँच सके  सीमा आज़ाद के जन्मदिन पर उनके और उनके पति की रिहाई की मांग करते हैं।  8 जून को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री सुनील कुमार सिंह की अदालत द्वारा ढाई साल से नैनी केन्द्रीय कारागार में निरुद्ध रही सीमा आजाद और उनके पति विश्वविजय को विभिन्न धाराओं में उम्र कैद की सज़ा सुना दी थी जबकि हकीकत यह थी कि सीमा आज़ाद अवैध्य खनन माफिया के विरुद्ध अभियान चला रही थीं। गैर कानूनी कारोबारियों को बचाने के लिए कानून का गलत प्रयोग करके सीमा आज़ाद और उनके पति को जेल मे रखा गया है। आज सीमा आज़ाद के जन्मदिन पर उनकी ही आवाज़ मे ये पाँच क्रांतिकारी गीत सुनिए-




   

2 comments:

मोहन श्रोत्रिय said...

न्यायालय तक आपकी बात न सिर्फ़ पहुंची, उस पर अमल भी हो गया. मुबारक.

विजय राज बली माथुर said...

धन्यवाद डॉ साहब ।