मुस्लिम बंधुओं ने बनाया था ऐतिहासिक सुपर कंप्यूटर---
यह दुर्लभ खगोलीय एस्ट्रोलैब 17वीं शताब्दी में पीतल से बनाया गया था। जमाने की अद्भुत कलाकारी देख इसे पुराना सुपर कंप्यूटर नाम दिया गया। अब यह लंदन में नीलाम किया जाएगा।
...ऐसा बताते हैं कि 17वीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में भारतीयों में उच्च दर्जे की खगोलीय रुचि थी। मुगल साम्राज्य में लाहौर खगोलीय उपकरण बनाने का प्रमुख केंद्र बना। यहां ज्ञान विज्ञान के एक संस्थान का नाम लाहौर स्कूल था। यहां खगोलीय उपकरण बनाने का शिल्प एक ही परिवार के चार पीढ़ियों तक पिता से पुत्र के बीच आगे बढ़ता रहा। लंदन में मौजूद दुर्लभ एस्ट्रोलैब को दो भाई कइम मोहम्मद और मोहम्मद मुकिम ने इसी स्कूल में बनाया था।
...वर्ष 1612 में तैयार किया गया यह एस्ट्रोलैब उस जमाने का अपनी तरह का सबसे बड़ा कंप्यूटर था। इसे सरदार आगा अफजल ने बनवाया था। वह मुगल साम्राज्य के एक बेहद शक्तिशाली सरदार थे और उस समय सम्राट जहांगीर के अधीन लाहौर का प्रशासन संभालते थे। बाद में यह जटिल उपकरण महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय के शाही संग्रह का हिस्सा रहा फिर उनकी पत्नी गायत्री देव के पास सुरक्षित रहा। उसके बाद निजी संग्रह में लंदन चला गया।
...इसकी कारीगरी वाकई अद्भुत है। इसमें 94 शहरों के देशांतर और अक्षांश सहित विविध विवरण अंकित हैं। फूलों की नक्काशी से जुड़े 38 तारा चिह्न हैं, पांच प्लेटें हैं और डिग्री का विभाजन बेहद बारीक है। इस एस्ट्रोलैब पर तारों के फारसी नाम और देवनागरी लिपि में संस्कृत नाम अंकित हैं। इसपर मक्का, बीजापुर, अजमेर, कश्मीर और लाहौर के स्थानों को दर्शाने वाली पट्टियां भी हैं। इसकी विकसित तकनीक को देख इसे सुपर कंप्यूटर कहा गया। यह इस्लामिक जगत और भारत की कला का बेजोड़ नमूना है।
...दोनों भाइयों ने कई एस्ट्रोलैब बनाए जो आज भी मौजूद हैं। इन दोनों ने मिलकर एक अन्य एस्ट्रोलैब बनाया था, जो अब इराक के राष्ट्रीय संग्रहालय में है। उसका व्यास मात्र 12 सेंटीमीटर है।
...लंदन में मौजूद सुपर कंप्यूटर को अगले सप्ताह सोथबी नीलामी घर में नीलाम किया जाएगा। इसका व्यास 29.5 सेंटीमीटर और ऊंचाई लगभग 50 सेंटीमीटर है। नीलामी में इसकी अनुमानित कीमत 15 से 25 लाख पौंड के बीच है। नीलामी की अन्य प्रमुख कलाकृतियों में जहांगीर की एक मुगलकालीन पेंटिंग भी शामिल है। इसकी अनुमानित कीमत 150,000 से 200,000 पौंड के बीच है।
.. भारत ऐसे ही ज्ञान और कला के लिए विख्यात था..