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Tuesday, May 12, 2015

एथीस्ट और ढ़ोंगी-पाखंडी 'सत्य ' को चाहे जितना दबाएँ पर झुठलाया नहीं जा सकता --- विजय राजबली माथुर


 25 अप्रैल 2015 को आए भूकंप की तीव्रता 7.8 थी और आज 12 मई 2015 को आए भूकंप की तीव्रता 7.3 रही किन्तु इस बीच समाचार-पत्रों के अनुसार  और भी कई छोटे-छोटे झटके महसूस किए जा चुके हैं । इस संबंध में 28 अप्रैल को निम्नांकित नोट द्वारा पूर्व प्रकाशित चेतावनी को संदर्भ सहित सार्वजनिक किया था। तब एक 'एथीस्ट' ने ज्योतिष का मखौल उड़ाया था जिस पर हिंदुस्तान की यह कटिंग प्रस्तुत करते हुये 30 अप्रैल को टिप्पणी दी थी :
"ओवर स्मार्ट टिप्पणीकार ने 'ज्योतिष' का मखौल तो आसानी से उड़ा दिया क्या हिंदुस्तान अखबार मे छ्पी इस रिपोर्ट की धज्जियां उड़ाने का साहस उनके पास है? वस्तुतः 'ज्योतिष-विज्ञान' द्वारा यह ज्ञात किया जा सकता है कि ब्रह्मांड में विचरित ग्रह-नक्षत्रों के प्रभाव से पृथ्वी पर कब क्या घटना घटित होने के योग हैं। यदि समुचित उपाय (पोंगापंथी-ब्राह्मणवादी नहीं) किए जाएँ तो बचाव सुनिश्चित है।"
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=873891152672862&set=p.873891152672862&type=1&theater 
आज और इस बीच आए भूकंप के सभी झटके ब्रह्मांड स्थित ग्रहों के 'गुरुत्वाकर्षण शक्ति' का ही परिणाम रहे हैं और वैज्ञानिक तथा एथीस्ट उनको न रोक सके हैं न ही झुठला पाये हैं। वह नोट पुनः अवलोकनार्थ प्रस्तुत है :
25 व 26 अप्रैल को आए भूकंप के झटके भी प्राकृतिक प्रकोप की झलकी मात्र हैं।इस समय सूर्य अपनी उच्च राशि 'मेष'में तथा शनि अपनी शत्रु राशि वृश्चिक में थे अर्थात दोनों में परस्पर 6 व 8 के संबंध थे जिसका परिणाम :
षडाष्टकी रवि मंद की,नहीं सुखद प्रतिचार ।
आंदोलित जन साधना, श्रमिक द्वंद विस्तार । ।
यान खान घटना विविध, विश्व मंच परिवेश ।
आरक्षी सेनापति, कष्टद भार विशेष। ।
वार पाँच** गणना गति,रविवासर अभिलक्ष ।
रोग शोक विपदा मति,निर्णय कथन विदक्ष । ।
**:
(05 अप्रैल से 04 मई 2015 तक वैशाख माह में पाँच रविवार पड़ रहे हैं। इनका भी प्रभाव इस भूकंप पर तथा हालिया नक्सल पंथी हमलों में रहा है जिसमें सुरक्षा बलों की क्षति हुई थी।)
03 मई 2015 की रात्रि 11:52 पर मंगल वृष राशि पर आएगा और 15 जून 2015 की रात्रि 01:08 तक रहेगा अर्थात परस्पर शत्रु ग्रह पूर्ण 180 डिग्री के कोण पर रहेंगे। इसके परिणाम स्वरूप (निर्णय सागर पंचांग पृष्ठ-33) :---
चलन कलन शनि भौम का ,सम सप्तम संचार ।
तपन ताप वृद्धि सहित, ऋतुकोप संसार । ।
अग्नि वात विस्फोटकी,जन धन क्षति प्रहार।
भू-क्रंदन भय आपदा, विविध भाग विस्तार । ।
अतः जनता व सरकारों को पहले से ही सुरक्षात्मक उपाय करने चाहिए।
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लेकिन इसके लिए जिम्मेदार मुख्य रूप से समाज में प्रचलित अवैज्ञानिक मान्यताएं और धर्म के नाम पर फैले अंध-विशवास एवं पाखण्ड ही हैं.विज्ञान के अनुयायी और साम्यवाद के पक्षधर सिरे से ही धर्म को नकार कर अधार्मिकों के लिए मैदान खुला छोड़ देते हैं जिससे उनकी लूट बदस्तूर जारी रहती है और कुल नुक्सान साम्यवादी-विचार धारा तथा वैज्ञानिक सोच को ही होता है.http://krantiswar.blogspot.in/2014/04/blog-post_14.html

  ~विजय राजबली माथुर ©
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