कुछ लोगों के लिए देशप्रेम का मतलब कोयल की कूक , नदियों का कलकल - छलछल , झरना का झर- झर , सूर्योदय, सूर्यास्त , पहाड, अतीत का झूठा महिमामंडन आदि है और भूख ,शिक्षा ,स्वस्थ, बराबरी, न्याय ,शोषण -मुक्ति ,अवसर की समानता जैसे मुद्दों का मतलब देशद्रोह है l इन मुद्दों पर से ध्यान हटाने के लिए जोर - जोर से चिल्लाना उनके लिए देशप्रेम है l
Jitendra Verma
जेएनयू संकट : संकट की आहट
हाल में जेएनयू के घटना – क्रम ने पूरे देश को उद्धेलित किया है l विदेश में भी भारत की छवि बदरंग हुई है l यह विश्वविद्यालय अपने स्थापना काल से बहस , नए विचार , तर्क आदि का केंद्र रहा है l
जेएनू का ताजा प्रकरण छात्र – संघ के अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी से शुरू हुआ l उनपर आरोप था कि उन्होंने अपने भाषण में काश्मीर की आजादी के और अफजल के पक्ष में नारा लगाया था l भाषण के विडीयो रेकार्डिग के जांच में यह आरोप गलत साबित हुआ l इसी आधार पर कन्हैया को जमानत मिली l
इस विवाद में एक तरफ भारत सरकार है तो दुसरी तरफ जेएनयू के छात्र हैं l जबसे केंद्र में मोदी सरकार बनी है तबसे भाजपा जेएनयू के खिलाफ बोल रहें हैं l पिछले दिनों भाजपा के मुख – पत्र पाचजन्य और ऑर्गनाइजर में एक रिपोर्ट छपी जिसमें कहा गया कि जेएनयू में देशद्रोही पैदा होते हैं , वह देशद्रोहियों का अड्डा है l आज इस विश्वविद्यालय से निकले लगभग छ हजार आई ए एस , आई पी एस देश में कार्यरत हैं l बिहार के वर्तमान मुख्य सचिव इसी विश्वविद्यालय की उपज हैं l तो यह मान लिया जाय कि अभी देश को देशद्रोही चला रहें हैं !
जेएनयू शुरू से नए विचारों का केंद्र रहा है l वहाँ नए विचारों को पूर्वग्रह मुक्त नजरिये से देखा जाता है l ऐसा नहीं है कि वहाँ सिर्फ वामपंथी विचारों के अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है l वहाँ हर कोई अपना विचार रख सकता है l भाजपा के विधार्थी परिषद की शाखा वहां काम कर रही है , छात्र – संघ के चुनाव में कई पदों पर उसके उम्मीदवार जीते भी हैं l कांग्रेस के शासनकाल में( 22 दिसम्बर 1966) स्थापित यह विश्वविद्यालय वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है l यह अन्य विश्वविद्यालयों से थोडा भिन्न है l यहाँ नोकरी के लिए पड़ना अच्छा नहीं माना जाता है l यहाँ का लक्ष्य ज्ञान प्राप्त करना माना गया है l इंग्लैंड का कैम्बिज और अमेरिका का हार्वड इसके आदर्श हैं l ऐसे विश्वविद्यालय का नाम जवाहरलाल नेहरु के नाम पर होना स्वाभाविक है l यह मानविकी , समाज विज्ञान , अन्तरराष्ट्रीय अध्धयन में उच्चस्तरीय शिक्षा एवं शोध के लिए बना है l
चिन्तन की प्रक्रिया आग्रह मुक्त होती है l किसी भी विचार , सिद्धांत , धारणा ,मान्यता आदि पर प्रश्नचिन्ह लगाना नए चिन्तन की पहली शर्त होती है l पहले के विचार , सिद्धांत , धारणा , मान्यता आदि का परीक्षण बुरा नहीं होता है l पर कमजोर विचार वार्लों को हरदम डर बना रहता है कि कही उनकी पोल खुल नहीं जाए l वे अपनी बात बंदूक के बल पर मनवाना चाहते हैं l जेएनयू में किसी भी मुद्दे पर बहस , विचार – विमर्श की पर्याप्त जगह रहती है पर ठस दिमागवालों को थोड़ी भी मतभिन्नता , असहमति बर्दाश्त नहीं होती है l
कुछ लोगों के लिए देशप्रेम का मतलब कोयल की कूक , नदियों का कलकल - छलछल , झरना का झर- झर , सूर्योदय, सूर्यास्त , पहाड, अतीत का झूठा महिमामंडन आदि है और भूख ,शिक्षा ,स्वस्थ, बराबरी, न्याय ,शोषण -मुक्ति ,अवसर की समानता जैसे मुद्दों का मतलब देशद्रोह है l इन मुद्दों पर से ध्यान हटाने के लिए जोर - जोर से चिल्लाना उनके लिए देशप्रेम है l
जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के बहाने जो घटनाएँ घट रहीं है उससे साफ़ है कि आज देश में भाजपा . आर . एस . एस . से असहमति , मतान्तर के लिए कोई जगह नहीं है l भाजपा और आर . एस . एस . से असहमति का एकमात्र अर्थ देशद्रोह है l यह विडम्बना ही है कि जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में अंग्रेजो का साथ दिया , गाँधी जी की हत्या की , राष्ट्रध्वज , राष्ट्रगीत को हरदम बदलने की मांग की वे आज देशभक्ति का प्रमाण पत्र बाँट रहें हैं !
जेएनयू के खिलाफ एक आरोप यह लगाया जा रहा है कि वहाँ के छात्र करदाताओं के पैसे से ऐयाश्शी करते हैं l ऐसे लोगों को शिक्षा पर होने वाला व्यय बेकार लगता है l यही वजह है कि मोदी सरकार अपने बजट में शिक्षा के व्यय पर कटैती कर रही है l भाजपा के विधायक ने बड़े परिश्रम से गिना कर बताया कि जेएनयू में प्रतिदिन कितने कंडोम , कितने शराब की बोतल , कितने सिगरेट के टुकडे , कितने मुर्गे की हड्डी , कितने मुर्गी की हड्डी मिलते हैं ! इस विश्वविद्यालय की व्यवस्था हरदम रफ एंड टफ रही है l कैंटीन में ग्लास नहीं रहता , सभी जग से ही पानी पीते हैं l जींस और कुर्ता यहाँ का सदाबहार ड्रेस है l यहाँ के छात्र रात – रात भर पढने के लिए जाने जाते हैं l ऐसी जगह पर सेना को तैनात करना शर्मनाक है l भारत इतना कमजोर नहीं है कि किसी के कहने या भाषण से टूट जाएगा l
Jitendra Verma
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~विजय राजबली माथुर ©
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