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Thursday, October 1, 2015

प्रकृति से खिलवाड़ मानवता के सफाये की ओर कदम --- विजय राजबली माथुर

****** जब पहली बार भाजपा नीत सरकार बनी थी तभी देश की नदियों को आपस में जोड़ने की मुहिम शुरू  हुई थी और अब भाजपा के पूर्ण बहुमत की सरकार में फिर से इस कार्यक्रम पर अमल शुरू हो गया है। विकास के नाम पर नगरों की जो स्थिति बन गई है उसमें वर्षा का जल अब धरती में समाहित नहीं हो पाता है बल्कि बह कर नष्ट हो जाता है जिस कारण भू-गर्भ जल स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। जंगलों के कटाव से वर्षा का कम होना व वर्षा जल का नष्ट होना स्थिति को भयावह बना रहा है। वैज्ञानिकों ने नदियों के जुड़ाव को वर्षा-चक्र के लिए हानिकारक बताया है। 

सरकारें जनता का नहीं मात्र व्यापारियों/उद्योगपतियों का हित देख रही हैं जिनका उद्देश्य शोषण-उत्पीड़न के जरिये अधिकाधिक 'धन' कमाना है। अतः जन पक्षधर शक्तियों का कर्तव्य है कि इस ओर गंभीरता पूर्वक ध्यान देकर शासकों के विरुद्ध जोरदार अभियान चलाएं अन्यथा जब मानवता ही नहीं बचेगी तो बाकी योजनाएँ व विकास किसके लिए? क्या देश का यह विनाश विदेशियों के लिए तो नहीं ?











  ~विजय राजबली माथुर ©
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