Monday, January 16, 2012

यूरोप से श्रेष्ठ था भारत

सच्च मे भारत कभी विश्व गुरु ही था ,नीचे के स्कैन को डबल क्लिक कर देखें-

हिंदुस्तान-6 जनवरी2012 
जब यूरोप के लोग नग्न रहते थे और पेड़ों पर शरण लेते थे हमारे भारत देश मे ज्ञान-विज्ञान का काफी विस्तार हो चुका था। उपरोक्त विवरण हमे बताता है कि लार्ड मैकाले की शिक्षा-व्यवस्था भारत के इसी ज्ञान-विज्ञान को गौड़ बनाने का उपक्रम थी। हमारे आज के विद्वान इस आधुनिक शिक्षा का गुण गाँन  करते नहीं थकते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि जर्मनी के मैक्स मूलर साहब हमारे देश मे आकर 30 वर्ष रह कर पहले 'संस्कृत' सीख कर फिर मूल पांडु लिपियों को लेकर चले गए। उन्हीं के जर्मन अनुवादों से भौतिकी का परमाणु-विज्ञान और 'दर्शन' का मार्क्स वाद सृजित हुआ जिन्हें यूरोपीय सिद्धान्त कहा गया। वस्तुतः यह सब हमारे अतीत के ज्ञान का ही प्रतिफल था जिसका श्रेय बड़ी चालाकी से यूरोप के गोरे लोगों ने ले लिया।

उपरोक्त विवरण के निष्कर्ष के  अनुसार ब्रिटिश साम्राज्यवादियो ने जान-बूझ कर हमारे ज्ञान को कुचला और अपनी श्रेष्ठता नई शिक्षा-व्यवस्था के माध्यम से स्थापित की। विकी पीडिया भक्त बड़े पत्रकार पाश्चात्य ज्ञान के सहारे अपनी विद्वता का प्रदर्शन करते नहीं थकते हैं । इतिहास पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि पृथ्वी राज चौहान द्वारा हारे हुये मोहम्मद गौरी को बख्श देने से ही हमारी परतन्त्र्ता की शुरुआत हुई थी क्योंकि बाद मे इसी गौरी ने हमारे देश मे 'गौर वंश' की स्थापना करके विदेशी शासन का सूत्रपात किया था। इन विदेशी शासकों ने केवल तलवार के बल पर नहीं बल्कि 'सांस्कृतिक हमले'द्वारा भी भारत को राजनीतिक के साथ-साथ 'मानसिक गुलाम' भी बनाया। शासकों की शह पर धन व सत्ता के लोलुप भारतीय विद्वानों ने अपने निजी स्वार्थ और शासकों के हित मे 'कुरान' की तर्ज पर 'पुराणों' की रचना की जिनके माध्यम से भारतीय प्राचीन ज्ञान-विज्ञान को विकृत किया गया जो आज तक भी चल रहा है और यही अज्ञान धार्मिकता का जामा पहन कर बहुसंख्यक जनता के सिर चढ़ कर बोल रहा है। पढे-लिखे,खाते-पीते लोग ज्यादा अज्ञान -अंध विश्वास फैलाते हैं जिससे उनका शोषण-उत्पीड़न बदस्तूर जारी रह सके। अल्पसंख्यक समृद्ध वर्ग बहुसंख्यक शोषित वर्ग को दबाये रखने हेतु 'सत्य,ज्ञान-विज्ञान' की बात करने वालों को धर्म विरोधी कह कर उपहास  उड़ाता है।

दूसरी तरफ शोषित,उत्पीड़ित जनता के रहनुमा भी शोषकों द्वारा प्रचारित कुरीतियों को ही धर्म मानते हैं और धर्म की वास्तविकता को न खुद समझते हैं न ही अपनी जनता को समझाना चाहते हैं। नतीजा यह होता है कि शोशंणकारी शक्तियाँ धर्म के नाम पर गुमराह करके जनता को उल्टे उस्तरे से मूंढ़ती रहती हैं। 1810 से पूर्व जो भारत लगातार गुलामी मे गुमराह रहने के बावजूद यूरोप से आगे था ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के कुचक्र के कारण अब यूरोप से पिछड़ चुका है।

यदि हम भारत को अपना प्राचीन गौरव पुनः दिलाना चाहते हैं तो गुलामी के 900 या 1100 वर्षों के दौरान हमारी संस्कृति के साथ किए गए षड्यंत्र को पहचान कर 'पौराणिक गाथाओं' के भंवर जाल से मुक्त कराना होगा और पुनः वेदिक मूल्यों को जो समष्टि अर्थात समानता पर आधारित थे स्थापित करना होगा, जाति-धर्म ,संप्रदाय के भेद और विषमता को मिटाना होगा। हमे पहचानना होगा साम्राज्यवादियों की एजेंट शक्तियों को और उनसे बचना होगा । हम ऐसा कर सकते हैं यदि 'मनसा-वाचा-कर्मणा'  समस्त देशवासियों को एक मान कर चले-फूट और अलगाव वाद के हिमाईतियों को शिकस्त दे सकें। अभी उत्तर-प्रदेश आदि पाँच राज्यों की जनता के समक्ष चुनाव यह अवसर प्रदान कर रहे हैं। निर्णय जनता को ही लेना है। 

Thursday, January 12, 2012

विवेकानंद जयंती -राष्ट्रीय युवा दिवस





आज स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर आपने उपरोक्त Zero पर गाना सुना जिस Zero पर स्वामी जी ने शिकागो के सर्व-धर्म सम्मेलन मे उद्बोधन किया था और विश्व मे अमर हो गए। उनके विचारों पर गत वर्ष मैंने यह लिखा था जो आज भी उतना ही चस्पा होता है ,पुनः देख सकते हैं-

http://krantiswar.blogspot.com/2011/01/blog-post_12.html

स्वामी विवेकानंद ने विशेषकर युवाओं के उत्थान पर अत्यधिक बल दिया था,इत्तिफ़ाक से 12 जनवरी को ही 'राष्ट्रीय युवा दिवस' भी घोषित किया गया है जो स्वामी जी का जन्मदिवस भी है। उन्होने भारतीय युवकों से कहा था-'उठो जागो और महान बनो ' - यह नारा आज भी युवकों के लिए उतना ही दुरुस्त है जितना तब था। युवकों का दायित्व है कि वे स्वामी जी के सपनों का वह भारत बनाएँ जिसमे हर निर्धन की झोंपड़ी मे खुशियों के दीप जल सकें। 

Wednesday, January 11, 2012

1965 के योद्धा शास्त्री जी का पुण्य तिथि पर स्मरण





गत वर्ष शास्त्री जी की पुण्य-तिथि पर मैंने उनके प्रधान मंत्रित्व तक पहुँचने का विवेचन किया था-

http://krantiswar.blogspot.com/2011/01/blog-post_10.html



जैसा की आपने ऊपर के वीडीयो  मे गाने मे देखा/ सुना हमारे देश के किसानों की खुशहाली ही समस्त देशवासियों के लिए खुशहाली होती है। शास्त्री जी ने 1965 के भारत पाक संघर्ष के दौरान  अमरीकी PL -480 को ठुकरा कर एक वक्त उपवास की अपील की और जनता ने उसे सिर माथे पर लिया। उपरोक्त स्कैन मे उनकी ईमानदारी और कर्मठता का जो विवरण है वैसे ही नेताओं को यदि जनता आज भी चुने तो देश फिर खुशहाल हो सकता है। 

Tuesday, January 10, 2012

यू पी चुनावों मे बामपंथ की भूमिका


उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनावों मे भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी ने दूसरे बामपंथी दलों के साथ मोर्चे के रूप मे चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है और अपने कुल 55 प्रत्याशी खड़े किए हैं। उत्तर प्रदेश के मत-दाताओं से विनम्र अनुरोध है की जहां कहीं भी बाम-पंथी और जनता दल (से) के प्रत्याशी हैं उन्हें भारी बहुमत से चुनकर विधान सभा मे भेजें जिससे कि आम जनता की आवाज को सदन के भीतर बुलंद किया जा सके।  


वामपंथी दलों तथा जनता दल (सेकुलर) की प्रेस वार्ता

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी तथा जनता दल (सेक्यूलर) के राज्य नेतृत्व ने 9 जनवरी को लखनऊ में प्रेस वार्ता में निम्नलिखित बयान जारी किया:
    ”उत्तर प्रदेश में विधान सभा के चुनावों की घोषणा हो चुकी है। इस चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी तथा जनता दल (सेकुलर) ने मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार आदि के साथ-साथ आम जनता के हित में वैकल्पिक आर्थिक नीतियों को चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया है।
प्रदेश में चुनाव लड़ रही बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस तथा अन्य पार्टियों के बीच आर्थिक नीतियों पर आम सहमति है। जिनके कारण मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार एवं अपराध सभी बढ़ रहे हैं। वामपंथी वैकल्पिक आर्थिक नीतियां ही आम जनता को राहत दिला सकती हैं, जिसके लिए देश एवं प्रदेश के स्तर पर लगातार ये दल संघर्ष करते रहे हैं।
वामपंथी दल और जनता दल (सेक्यूलर) प्रदेश में साम्प्रदायिक एवं जातिवादी राजनीति करने वाली शक्तियों के खिलाफ लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष एवं वामपंथी राजनीति को जनता के मध्य ले जाने का प्रयास करेंगी और आम जनता के संघर्षों को आगे बढ़ायेंगी।
वामपंथी दल और जनता दल (सेकुलर) ने आपस में तालमेल कर एक दूसरे के खिलाफ न लड़ने का फैसला किया हैं। ये दल आपस में मिल-जुल कर विधान सभा चुनाव लडेंगे तथा एक दूसरे के प्रत्याशियों को सफल बनाने में हर तरह से योगदान करेंगे।“


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी    भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)    आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक    रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी   , जनता दल (सेकुलर)


Saturday, January 7, 2012

चुनावी तमाशा और भ्रष्टाचार का रोना






(सभी  स्कैन कापियाँ 04 जनवरी 2012 को हिंदुस्तान ,लखनऊ मे प्राकाशित समाचारों  की हैं )
1947 मे ब्रिटिश साम्राज्यवाद से तकनीकी आजादी प्राप्त करने के बाद भी हमारे देश की विभिन्न सरकारें शुरू मे ब्रिटेन फिर अमेरिकी सरकारों से प्रभावित होती रही हैं। किन्तु फिर भी नेहरू जी की दूरदर्शिता थी जो उन्होने यूगोस्लाविया के मार्शल टीटो और मिस्र के कर्नल अब्दुल गामाँल नासर से मिल कर 'गुट निरपेर्क्ष' नामक एक गुट बना कर कुछ हद तक स्वतंत्र निर्णय  लिए। किन्तु अमेरिकी CIA शुरू से ही सरकार मे घुसपैठ मचाती रही है। इन्दिरा जी के मंत्रिमंडल मे मोरार जी देसाई को उसने अपना एजेंट बताया और माईकल हर्षमेन नामक पत्रकार ने इसका भण्डा-फोड़ किया। तब तक मोरार जी प्रधानमंत्री भी रह चुके थे उन्होने डॉ सुब्रमनियम स्वामी के सुझाव पर अमेरिकी अदालत मे हर्षमेन के विरुद्ध मुकदमा चलाया और केस हार गए।

नेहरू जी के मंत्रीमंडल मे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी बानिज्य मंत्री थे जिन्होने 'मिश्रित अर्थ-व्यवस्था' का सूत्र-पात किया था। वह आर एस एस से संबन्धित थे और जब उन्हे अपनी नीतियो को लागू करने मे दिक्कत हुई तो उन्होने स्तीफ़ा देकर 'जनसंघ' बना लिया जो आर एस एस का राजनीतिक विंग था। 1925 मे आर एस एस की स्थापना ब्रिटिश साम्राज्यवाद को सहयोग देने एवं 1925 मे ही स्थापित कम्यूनिस्ट पार्टी के आजादी के आंदोलन मे क्रांतिकारी संघर्ष को विफल करने हेतु की गई थी।

1977 मे यह जनसंघ 'जनता पार्टी' मे विलय हो गया था। अतः उससे अलग होकर 1980 मे अटल/आडवाणी ने 'भाजपा' की स्थापना की जिसने पहले 'गांधीवादी समाजवाद' का नारा उछाल कर जनता को पक्ष मे करना चाहा और असफल रहने पर 'राम मंदिर' आंदोलन चला कर 'मण्डल' की सिफ़ारिशों पर लागू आरक्षण को धता बता कर 1991 मे यू पी मे अपने बहुमत की सरकार बना ली। फिर दूसरी पार्टियों के सहयोग से 1998 से 2004 तक केंद्र की सत्ता अमेरिकी साम्राज्यवाद के हित मे चलाई। पोखरण विस्फोट की सूचना बाकायदा अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन साहब को भारतीय प्रधानमंत्री बाजपाई साहब ने लिखित मे भेजी।

वर्तमान मनमोहन सरकार भी अमेरिकी साम्राज्यवाद के ही हित मे कार्य कर रही है। जनता के दृष्टिकोण से भाजपा/कांग्रेस की नीतियाँ एक ही हैं। विदेशी शक्तियाँ भारत मे भी ब्रिटेन और अमेरिका की भांति अलग-अलग लेबल वाली दो समान पार्टियों की मौजूदगी चाहती हैं। इसलिए अमेरिका ने पहले मानेका गांधी फिर कांशी राम को आगे करने के प्रयास किए थे। अब अभी हाल मे अन्ना हज़ारे को आगे किया गया था जिन्हें आर एस एस/भाजपा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का समान समर्थन प्राप्त था।

गरीब-मेहनत कश जनता के अन्ना के छलावे मे न आने के कारण केवल साधन-सम्पन्न और खाते-पीते मद-मस्त शोषक अमीरों के सहारे अन्ना को जन-नेता नहीं बनाया जा सका। इसी कारण अमेरिका को उनसे हाथ खींचना पड़ा। इसका दूसरा कारण यह था कि, CIA का एक सहयोगी संगठन ISCON साईबेरिया की अदालत मे उसके संस्थापक द्वारा व्याख्यायित 'गीता'  (जो योगीराज श्री कृष्ण के उपदेशों से भिन्न है)पर प्रतिबंध का सामना कर रहा था। अमेरिका ने अपने भारतीय संपर्कों का लाभ उठा कर संसद मे इसका शोर मचवा दिया । सभी दलों के लोगों ने(जिनमे सपा,राजद,बसपा भी शामिल हैं) बगैर कुछ भी समझे-बूझे सरकार पर दबाव बनाया कि वह रूसी अदालत के संभावित निर्णय को बद्ल् वाये और हमारे विदेशमंत्री कृष्णा साहब ने रूसी राजदूत को बुला कर समझा दिया भारत की जनता रूस के खिलाफ हो जाएगी यदि वहाँ की सरकार ने अपनी याचिका वापिस न ली तो। रूसी प्रधानमंत्री अपने देश की जनता द्वारा चुनाव-धांधली के असंतोष का सामना कर रहे थे उन्होने याचिका की कमजोर पैरवी करवाई और अदालत ने सरकारी याचिका खारिज कर दी। इस प्रकार अमेरिकी साम्राज्यवाद के मंसूबों को हमारे देश की सरकार ने यहाँ के विपक्षी दलों के सहयोग से पूरा कर दिया।

आगामी विधान सभा चुनावों मे अपनी आर्थिक  स्थिति सुदृढ़ करने हेतु भाजपा ने बसपा सरकार के भ्रष्टाचार मे निष्कासित नेताओं को अपनाना शुरू कर दिया जैसा कि उपरोक्त स्कैन कापियों से स्पष्ट होता है।बाबरी मस्जिद कांड के समय भाजपा के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह जी ने बाबू सिंह  कुशवाहा को भाजपा मे शामिल करने को करोड़ों की डील एक प्रेस कान्फरेंस मे बताया है।  केरल,पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के अपने शासन काल मे कम्युनिस्टों ने आम जनता के हितों का ध्यान रखा और वे किसी भ्रष्टाचार मे नहीं फंसे। पंजाब ,उत्तर प्रदेश आदि के इन चुनावों मे जहां जितने भी 'बामपंथी प्रत्याशी' हैं उन्हें जितवाने का प्रयास किया जाये तो चुनावों के बाद भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने  की संभावना रहेगी वर्ना तो ये चुनाव भी तमाशा ही साबित होंगे और भ्रष्टाचार का रोना वैसे ही रोया जाता रहेगा। 







   
                             (हिंदुस्तान,लखनऊ के 07 जनवरी 2012 अंक मे प्रकाशित)


उपरोक्त दोनों स्कैन कापियों को पढ़ने के बाद अन्ना भक्त ब्लागर्स जिनहोने अपने-अपने ब्लाग्स मे अन्ना और उनकी टीम की तारीफ़ों के पुल बांधे थे और उनकी पोल खोलने वालों को कोसा था अब क्या कहना चाहेंगे?'आज तक डाट काम ' मे साहिल जोशी साहब ने लिखा है कि इस संबंध मे प्रश्न पूछने पर अन्ना प्रेस कान्फरेंस छोड़ कर भाग खड़े हुये थे और उसे सब ने लाईव टेलीकास्ट मे देखा था।

शांतिभूषण स्टांप घोटाला मे फंसे हैं तो उनके पुत्र प्रशांत काश्मीर को देश से हटाना चाहते हैं और खुद उन्होने नियम विरुद्ध हिमाचल प्रदेश मे भाजपा सरकार से चाय बागान लिए हैं और नोयडा मे बसपा सरकार से जमीन ले चुके हैं -ये दोनों दल अन्ना के गीत गा रहे थे। किरण बेदी हवाई टिकटों के गोलमाल मे पकड़ी जा चुकी हैं और अरविंद केजरीवाल 09 लाख रुपया अवैध्य वेतन ले चुके थे जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय मे अंडर प्रोटेस्ट वापिस किया है। खुद अन्ना को 'भाजपा/शिव सेना' सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप मर जेल भेजा था। महाराष्ट्र की जनता ने अन्ना को आईना साफ-साफ दिखा दिया है। अन्न-भक्त ब्लागर्स/फेसबुकिए अपना चेहरा कब आईने मे देखेंगे?                                                         *                 *                *
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महत्वपूर्ण सूचना -

अन्ना-भक्त ब्लागर्स ने अपने -अपने ब्लाग्स मे टिप्पणियॉ के संबंध मे लिखा है कि जो लोग टिप्पणियों पर निर्भर नहीं करते हैं वे अपने ब्लाग्स मे टिप्पणी बाक्स बंद क्यों नहीं कर देते?उनकी चुनौती सिरोधार्य करके आज से इस ब्लाग मे टिप्पणी बाक्स बंद किया जा रहा है।