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Friday, May 8, 2026

ये सिर्फ़ एसआईआर का प्रभाव है ------ Mukesh Kumar

 
ममता बैनर्जी का दावा है कि बीजेपी ने उनसे 100 सीटें छीनी हैं। राहुल गाँधी ने उनके इस दावे का समर्थन भी किया है। तमाम विपक्षी दल भी उनसे सहमत हैं। लेकिन बीजेपी और गोदी मीडिया तरह-तरह के तर्क और आँकड़े देकर उन्हें झुठलाने में लगा हुआ है। 
इस अभियान के तहत एक नरैटिव ये बनाया जा रहा है कि ममता बैनर्जी की हार जनता की ज़बर्दस्त नाराज़गी की वज़ह से हुई। ये सही है कि पंद्रह साल से सत्ता में रहने की वज़ह से एंटी एनकंबेंसी रही होगी। मगर ये नहीं भूलना चाहिए कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने ज़बर्दस्त प्रदर्शन किया था और बीजेपी को धूल चटा दी थी। 
दूसरे नरैटिव के तहत बताया जा रहा है कि हिंदुत्व की सुनामी ने ममता को डुबा दिया। यानी बीजेपी का घुसपैठिए का हौआ और ममता बैनर्जी का तथाकथित मुस्लिम प्रेम उनके ख़िलाफ़ चला गया। 
इसे भी आंशिक रूप से ही सही माना जा सकता है। सचाई ये है कि ये तमाम तर्क वोट चोरी को छिपाने के लिए दिए जा रहे हैं। कोशिश ये की जा रही है कि लोग धांधलियों की बात करने के बजाय ममता की नाकामी और बीजेपी की अभूतपूर्व कामयाबी की बात की जाए। 
लेकिन सचाई क्या है, आँकड़े क्या कहते हैं...जबरन थोपी गई एसआईआर का चुनाव पर कोई असर पड़ा या नहीं पड़ा। आँकड़ों की छानबीन करके बताया जा रहा है कि 49 से लेकर 105 सीटें ऐसी हैं जिन पर एसआईआर का असर देखा जा सकता है। बल्कि कहा जा सकता है कि एसआईआर की वज़ह नतीजों पर सीधा असर पड़ा। 
द वायर के मुताबिक 150 सीटें ऐसी हैं जिन पर हार जीत का अंतर हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम रहा। बीजेपी ने इनमें से 99 सीटें जीतीं, जबकि 2021 में उसने केवल 19 सीटें जीती थीं। यानी 80 सीटों का फ़ायदा। 
स्क्रोल . इन के मुताबिक 105 ऐसी सीटें हैं जिनमें बीजेपी की जीत का अंतर उन सीटों पर काटे गए वोटों से कम है। यानी अगर वोट नहीं काटे गए होते तो बीजेपी शायद नहीं जीत पाती। 
चुनाव में टीएमसी ने 129 सीटें गँवाई हैं। अगर इनमें से स्विंग सीटों को देखें तो 86 सीटें ऐसी हैं जिनमें बीजेपी की जीत का अंतर काटे गए वोटों से भी कम है। 
जादवपुर सीट को लीजिए। पिछले चुनाव में बीजेपी यहाँ तीसरे नंबर पर थी। मगर इस बार वह सत्ताईस हज़ार वोट से जीत गई। इस सीट पर 56 हज़ार मतदाताओं के नाम काटे गए थे। 
द ऑल्ट के मुताबिक 49 सीटें ऐसी हैं जहाँ पर हार जीत का अंतर ऐसे वोटरों की संख्या से कम रहा जो इसलिए वोट नहीं डाल सके क्योंकि उनके मताधिकार का फ़ैसला ही नहीं हो सका। 
एक विश्लेषक विकास कुमार ने दिलचस्प आँकड़े दिए हैं। सबसे ज़्यादा डिलीशन वाली 100 सीटों में भारी उलटफेर हुआ है। उनके मुताबिक 2021 में इन 100 सीटों में से बीजेपी के पास केवल 20 सीटें थीं मगर एसआईआर की बदौलत वे बढ़कर 68 हो गईँ। यानी 48 सीटों पर खेला।
ध्यान रहे, ये सिर्फ़ एसआईआर का प्रभाव है। और दूसरी तरह से जो खेल किए गए उनका हिसाब किताब भी लगाया जाए तो बीजेपी कहाँ होगी सोचा जा सकता है।






 ~विजय राजबली माथुर ©
 

Tuesday, March 24, 2026

ममता बनर्जी की संभावनाएं ------ विजय राजबली माथुर

 


Friday, October 19, 2012

 "ममता बनर्जी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं ? "

उद्धृत लेख द्वारा मैंने स्पष्ट किया था :

पुराने अखबारों का अवलोकन करते समय सुश्री ममता बनर्जी की यह जन्मपत्री दिखाई दे गई जिसमे सन 2002 तक का उनका भविष्य लेखक ने अपनी थ्यौरी से दिया था। उसके सही-गलत होने की विवेचना मैं नहीं कर रहा हूँ। मैंने विगत विधानसभा चुनावों से पूर्व अपने एक लेख द्वारा ममता जी की कटु राजनीतिक आलोचना भी की थी और पश्चिम बंगाल की जनता से आह्वान भी किया था कि वह ममता जी को सत्तारूढ़ न होने दे। परंतु ममता जी मुख्यमंत्री बनी और बड़ी शान से बनीं। इसलिए भी कौतूहल था उनका भविष्य जानने का और इसलिए भी कि दार्जिलिंग ज़िले के सिलीगुड़ी मे 8वी कक्षा से 10वी बोर्ड की परीक्षा पास करने तक रहने के कारण बंगाल की राजनीति मे दिलचस्पी सदा ही रही है। वहाँ से 10-15 किलोमीटर दूर ही है नक्सल बाड़ी जहां 1967 मे 'नक्सल बाड़ी से नल बाड़ी तक' आंदोलन हमारे रहते ही शुरू हुआ था। इस आंदोलन का सम्पूर्ण लाभ राजस्थान के मारवाड़ियों को हुआ था जिनको इंश्योरेंस क्लेम नुकसान से कहीं बहुत ज़्यादा मिला था। अपनी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर आज भी मैं ममता जी का समर्थक नहीं हूँ,परंतु उनके ग्रह-नक्षत्र जो बोल रहे हैं उनको झुठलाया भी तो नहीं जा सकता। misuse of knowledge भी मैं नहीं कर सकता। अतः ममता जी की कुंडली का वैज्ञानिक निष्पक्ष  विश्लेषण प्रस्तुत करने मे कोई पूर्वाग्रह(IBN7 के प्रतिनिधि ब्लागर एवं उनकी  सहयोगी पूना प्रवासी ब्लागर की भांति जो ज्योतिष को मीठा जहर कहते हैं ) भी नहीं है। 



ममता जी की प्रस्तुत जन्मपत्री के अनुसार उनका जन्म लग्न-मकर है और---



द्वितीय भाव मे कुम्भ का 'मंगल'



पंचम भाव मे वृष का 'चंद्रमा'



षष्ठम भाव मे मिथुन का 'केतू'



सप्तम भाव मे कर्क का 'ब्रहस्पति'



दशम भाव मे तुला का 'शनि'



एकादश भाव मे वृश्चिक का 'शुक्र'



द्वादश भाव मे धनु के 'सूर्य','बुध' और 'राहू'



अखबारी विश्लेषण से अलग मेरा विश्लेषण यह है कि जन्म के बाद ममता जी की 'चंद्र महादशा' 07 वर्ष 08 आठ माह एवं 07 दिन शेष बची थी। इसके अनुसार 03 जूलाई 2010 से वह 'शनि'महादशांतर्गत 'शुक्र' की अंतर्दशा मे 03 सितंबर 2013 तक चलेंगी। यह उनका श्रेष्ठत्तम समय है। इसी मे वह मुख्य मंत्री बनी हैं। 34 वर्ष के मजबूत बामपंथी शासन को उखाड़ने मे वह सफल रही हैं तो यह उनके अपने ग्रह-नक्षत्रों का ही स्पष्ट प्रभाव है। 



इसके बाद पुनः 'सूर्य' की शनि मे  अंतर्दशा 15 अगस्त 2014 तक  उनके लिए अनुकूल रहने वाली है और लोकसभा के चुनाव इसी अवधि के  मध्य होंगे। केंद्र (दशम भाव मे )'शनि' उनको 'शश योग' प्रदान कर रहा है   

जो 'राज योग' है।



ममता जी को समयानुकूल सही बात कहने व उठाने का विलक्षण लाभ भी   उनके ग्रह प्रदान कर रहे हैं   

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आजकल इधर कई यू ट्यूब चेनल्स पर दिग्गज ज्योतिषी गण ' ममता बनर्जी ' के सत्ता वापसी को असंभव  बताते नहीं थक रहे है ऐसा  कर वे सत्तारूढ़ केंद्र सरकार से  पुरस्कार प्राप्त कर सकते हैं। 

मेरे अपने आँकलंन  के अनुसार ०६ फरवरी २०२६ से ०६ दिसंबर २०२८ तक ममता जी की बुध महादशान्तर्गत ' शुक्र' की अंतर्दशा चल रही है जो सुखदायक और श्रेष्ठ है उसके बाद भी ०९ मार्च २०३२ तक  ममता जी का समय लाभदायक,श्रेष्ठ और राज्य वृद्धिदायक होगा। अतः यदि व्यापक हेराफेरी ,धांधली और धूर्तता कामयाब न हो तो ममता जी की पुनः जीत अवश्य ही होगी। हम उनकी सफलता के लिए  मंगलकांनाएं। 











 ~विजय राजबली माथुर ©

Wednesday, April 12, 2017

जनवादी मोर्चा ममता बनर्जी के नेतृत्व में बना कर चुनाव लडें तो जीत सकते हैं ------ विजय राजबली माथुर


कामरेड ए बी बर्द्धन जी ने तो 2014 में ही ममता बनर्जी पर एतराज न होने की बात कही थी।किन्तु वाम  मोर्चा ने तब उनकी बात पर तवज्जो नहीं दी थी और नतीजा मोदी की ताजपोशी के रूप में सामने आया। अब इस खतरे से निबटने के लिए  लालू प्रसाद जी 2019 में वामपंथियों का भी सहयोग चाहते हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश में सपा का भाजपा समर्थक खेमा जब अपनी ही सरकार को हरवा सकता है तब लालू जी की बात की कितनी कद्र करेगा ? फिर भी यदि लालू जी व वाम  मोर्चा मिल कर एक व्यापक 'जनवादी मोर्चा '  सुश्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में गठित करने में सफल हो जाते हैं तो निश्चय ही सरकार बनाने में सफल हो जाएँगे।वाम मोर्चा को बर्द्धन जी की इस नसीहत को भी ( जिसका ज़िक्र  छात्र नेता कन्हैया कुमार ने किया है ) ध्यान रखना चाहिए कि, लेफ्ट या वाम का मतलब सिर्फ कम्युनिस्ट होना नहीं है बल्कि वे सभी जनवादी दल जो सांप्रदायिकता व फ़ासिज़्म के विरोधी हैं लेफ्ट या वाम हैं।  तामिलनाडू विधानसभा के आगामी चुनावों में राज्यसभा सदस्य ' रेखा जी ' को मुख्यमंत्री तथा आगामी लोकसभा चुनावों में ममता जी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना सफलता प्राप्त करने हेतु आवश्यक है अन्यथा पुनः फासिस्ट सरकार के दोहराव की संभावना रहेगी।  

कार्पोरेटी दलाल अवश्य ही ममता जी को पी एम बनने से रोकने की गंभीर साजिश करेंगे ।
केंद्र  (दशम भाव मे )'शनि' उनको 'शश योग' प्रदान कर रहा है  
जो 'राज योग' है।

ममता जी की कुंडली मे 'बुध-आदित्य'योग भी है वह भी 'राज योग' है। षष्ठम भाव का 'केतू' उनके शत्रुओं का संहार करने मे सक्षम है। सप्तम मे उच्च के 'ब्रहस्पति' ने जहां उनको अविवाहित रखा वहीं वह उनकी लग्न को पूर्ण दृष्टि से देखने के कारण 'बुद्धि चातुर्य'प्रदान करते हुये सफलता कारक है। जहां दशम मे उच्च का शनि उनको राजनीति मे सफलता प्रदान कर रहा है वहीं यही शनि पूर्ण दृष्टि से उनके सुख भाव को देखने के कारण सुख मे क्षीणता प्रदान कर रहा है। द्वितीय भाव मे शनि क्षेत्रीय 'मंगल' होने के कारण ही उनकी बात का प्रभाव उनके विरोधियों के लिए 'आग' का काम करता है जबकि यही जनता को उनके पक्ष मे खड़ा कर देता है।
 "






"अखिलेश ने ममता की मदद की यूपी विधानसभा चुनाव की कैम्पेनिंग के दौरान जब ममता ने नोटबंदी के खिलाफ लखनऊ में अपना विरोध प्रदर्शन किया था तो अखिलेश ने ही उनकी मदद की थी। खुद अखिलेश उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट गए थे। इससे पहले जब अखिलेश के परिवार में कलह चल रही थी तब भी ममता ने उन्हें फोन करके अपना समर्थन जाहिर किया था। मुलायम से नाराज थीं ममता बताया जाता है कि ममता बनर्जी पिछले प्रेसिडेंट इलेक्शन में मुलायम सिंह के यू-टर्न से काफी नाराज थीं। इस वजह से उन्होंने अखिलेश यादव को ही सपोर्ट करने पर फैसला लिया था।"
http://www.janshakti.co.in/category/national/-2019--177573





 











April 1 at 10:32am
DCM साहब के अनुसार इसके राजनीतिक निहितार्थ नहीं हैं। पूर्व राज्यपाल के एम मुंशी साहब जब केंद्रीय शिक्षामंत्री के रूप मे ब्रिटिश काउंसिल इन इंडिया का उदघाटन करने गए थे तब उन्होने स्पष्ट कहा था कि, वह वहाँ एक राजनीतिज्ञ की हैसियत से नहीं आए हैं क्योंकि एक राजनीतिज्ञ जब कहे हाँ तब समझें शायद और जब कहे शायद तब समझें नहीं और नहीं तो वह कभी कहता ही नहीं। बड़ी ही सफाई से पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार की पराजय में स्पष्ट भीतरघात को नकार दिया गया है। राजनीतिक नहीं तो व्यापारिक निहितार्थ तो होंगे ही और रिश्तेदारी की बात तो कही ही गई है 
https://www.facebook.com/vijai.mathur/posts/1383745161687456








~विजय राजबली माथुर ©

Monday, May 12, 2014

कौन बनेगा प्रधानमंत्री ?---विजय राजबली माथुर

प्रायोजित भविष्यवाणी जो निश्चय ही गलत साबित होगी :


  हिंदुस्तान-लखनऊ-03/04/2014 के इस स्कैन को पढ़ने हेतु डबल क्लिक करें। 

इस प्रकार के प्रायोजित भविष्यवाणियों का कोई वैज्ञानिक आधार न होकर धनदाता की संतुष्टि मात्र होता है। 2004 के चुनावों में राजग गठबंधन के परास्त होने के बाद 'बाबाजी' नामक पत्रिका ने 15 दिनों के भीतर पुनः बाजपेयी साहब के पी एम बनने की भविष्यवाणी कर दी थी और खुद बाजपेयी साहब पत्रिका संचालक से मिलने पहुँच गए थे लेकिन क्या हुआ?
उपरोक्त मामले में लखनऊ से केवल राजनाथ सिंह व उनके छिपे हुये सहयोगी अभिषेक मिश्रा जी का ज़िक्र हुआ है बाकी उम्मीदवारों का कोई उल्लेख नहीं है। वाराणासी में मोदी की सफलता का कसीदा काढ़ा गया है जबकि वह पश्चिम क्षेत्र से आते हैं। उनके हितैषी मुलायम सिंह जी का ज़िक्र है जो पश्चिम उत्तर प्रदेश के हैं। इस श्रंखला  में सुश्री ममता बनर्जी का कोई ज़िक्र नहीं है जो कि वस्तुतः पूर्व-क्षेत्र की वास्तविक प्रतिनिधि हैं।




11-04-2014 को दिया गया मेरा विश्लेषण:
Lucknow ·:08-22pm
नरेंद्र मोदी की राजनीति व उनके शुभ समय की जोरदार चर्चाये चल रही हैं । NBT द्वारा एक वर्ष पूर्व प्रकाशित उनकी जन्म कुंडली के अनुसार वह 64वें वर्ष में चल रहे हैं अर्थात अपनी कुंडली के चौथे भाव में जहां 'गुरु' अपनी शत्रु राशि में स्थित है। 'गुरु' का गुण यह भी है कि जहां जिस भाव में बैठता है उसे 'नष्ट' करता है। उनके साथ ऐसा ही रहा भी है विवाहित होकर भी 'विधुर' जैसा जीवन इसी 'गुरु' की कृपा रही है। अब पत्नी की घोषणा करके भी सुखों पर हमलों को उन्होने आमंत्रित कर लिया है। जन्म लग्न में भी परस्पर शत्रु 'चंद्र'-'मंगल' स्थित हैं। ये सम्मिलित रूप से उनके मस्तिष्क को प्रभावित कर रहे हैं जैसा कि उनकी कार्य प्रणाली व वक्तव्यों से सिद्ध होता है। लग्न का चंद्र मस्तिष्क को व्यथित रखता है।
महादशा-अंतर्दशा उनको 'आर्थिक' लाभ पहुंचाने वाली है इसी लिए कारपोरेट घरानों ने उनके लिए लूट की पूंजी के पिटारे खोल दिये हैं। लेकिन उनके 'कर्म' भाव में बैठ कर 'शनि' उनके कर्मफल को नष्ट कर रहा है। संकेत साफ हैं। वह केवल मोहरा ही रहने वाले हैं सफलता उनसे कोसों दूर रहने वाली है।

https://www.facebook.com/vijai.mathur/posts/671115686283744

इसकी पुष्टि मेरठ के ज्योतिषी साहब के विश्लेषण से भी होती है :




 बहुत पहले मैंने यह विश्लेषण दिया था जिसे 23 फरवरी 2014 को दोबारा ब्लाग पर प्रकाशित किया था एक नज़र उसका भी अवलोकन कर लें :
"अखबारी विश्लेषण से अलग मेरा विश्लेषण यह है कि जन्म के बाद ममता जी की 'चंद्र महादशा' 07 वर्ष 08 आठ माह एवं 07 दिन शेष बची थी। इसके अनुसार 03 जूलाई 2010 से वह 'शनि'महादशांतर्गत 'शुक्र' की अंतर्दशा मे 03 सितंबर 2013 तक चलेंगी। यह उनका श्रेष्ठत्तम समय है। इसी मे वह मुख्य मंत्री बनी हैं। 34 वर्ष के मजबूत बामपंथी शासन को उखाड़ने मे वह सफल रही हैं तो यह उनके अपने ग्रह-नक्षत्रों का ही स्पष्ट प्रभाव है।
इसके बाद पुनः 'सूर्य' की शनि मे अंतर्दशा 15 अगस्त 2014 तक उनके लिए अनुकूल रहने वाली है और लोकसभा के चुनाव इसी अवधि के मध्य होंगे। केंद्र (दशम भाव मे )'शनि' उनको 'शश योग' प्रदान कर रहा है जो 'राज योग'ही है।
27 नवंबर 2012 को स्थगित रैली 16 फरवरी 2014 को लखनऊ में  आयोजित करवाकर ममता जी ने संकेत दे दिया है कि यदि मुलायम सिंह प्रकाश करात के फेर में फंसे रहे तो वह  उनके  सहयोग के बगैर ही फेडरल फ्रंट की दिशा में बढ़ सकती हैं।यदि उत्तर-प्रदेश में ममता जी ने मायावती जी से तालमेल बैठा लिया तो यहाँ भी उनको काफी मजबूती मिल जाएगी।  सी पी एम में भाजपा के भगौड़ों को शामिल किए जाने से उसके भविष्य की दिशा का खुलासा हो चुका है। इस सूरत में ममता बनर्जी के तर्क जनता को आसानी से ग्राह्य हो सकते हैं। सी पी एम की शुतुरमुरगी चालें वामपंथ को जोरदार झटका दे सकती हैं। तब 'पाछे पछताए होत क्या? जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत' । अभी भी बहुत समय है कि सी पी एम को छोड़ कर समस्त वामपंथ एकजुट होकर  ममता बनर्जी के नेतृत्व में भाजपा/कांग्रेस/आ आ पा  को संयुक्त रूप से चुनावों में परास्त कर सकता है। 

 ~विजय राजबली माथुर ©
 इस पोस्ट को यहाँ भी पढ़ा जा सकता है।

Wednesday, February 26, 2014

जयललिता का जयगान और उसके उल्टे परिणाम ---विजय राजबली माथुर

  






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Digest this: #RajyaSabha MPs Sachin Tendulkar and actress Rekha have spent "zero" rupee on development in their respective adopted areas in the last 2 years.



एस श्रीनिवासन साहब का निष्कर्ष यों ही नहीं ठुकराया जा सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री के हत्यारों को इस तरह छोड़ा जाना जनता में विपरीत प्रभाव डाल सकता है विशेष कर अन्य प्रदेशों में तो ऐसा होगा ही। जयललिता जी के जन्मदिवस पर समर्थकों द्वारा 'संसद' की आकृति का केक काट कर खा जाना भी 'संसदीय लोकतन्त्र' के लिए खतरे की घंटी ही सुनाता है। 

फिर पटकनी खाएँगे प्रकाश करात :


https://www.facebook.com/cpofindia/photos/a.335629103138331.91488.120263388008238/721068401261064/?type=1&theater

सी पीएम महासचिव खुद को आधुनिक राजनीति का चाणक्य भले ही समझते रहें लेकिन उनको पटकनियाँ खाते रहने की आदत और शौक है। पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह के ज्योति बसु को 1996 में प्रधानमंत्री बनाने के सुझाव को ठुकरा कर भी उन्होने पटकनी ही खाई थी जिस पर बाद में कामरेड ज्योति बसु को 'ऐतिहासिक भूल' कह कर स्वीकारना ही पड़ा था। 

फिर 2012 में ममता बनर्जी द्वारा प्रणव मुखर्जी के विरोध को वास्तविक मानते हुये राष्ट्रपति चुनाव में उनको समर्थन देकर भी वाह ताज़ातरीन पटकनी खा चुके थे क्योंकि ममता जी ने बड़ी चतुराई से अंतिम क्षणों में प्रणव मुखर्जी साहब को खुला समर्थन दे दिया था। 

अपनी गलतियों से कोई सबक न सीखते हुये उन्होने इस बार जयललिता जी को पी एम बनाने का झण्डा बुलंद किया है जबकि जयललिता जी के बारे में एस श्रीनिवासन साहब का निष्कर्ष बिलकुल सटीक और व्यावहारिक है। 

CPI के आफ़िशियल पेज पर संलग्न फोटो यह बताता है कि  1964 में स्थापित पार्टी सी पी एम  के महासचिव साहब देश की सर्वाधिक पुरानी पार्टी CPI के महासचिव को तुच्छ समझते हैं तभी तो कामरेड सुधाकर रेड्डी साहब को अपने से पीछे की पंक्ति में स्थान दिलवाया है।1885 में स्थापित कांग्रेस के 1977 में जनता पार्टी में विलीन होने के बाद 1925 में स्थापित CPI ही आज सबसे पुरानी पार्टी है । केंद्रीय सत्ता में भागीदार इन्दिरा कांग्रेस की स्थापना तो 1969 ई में ही हुई है। 

सी पी आई को पृष्ठभूमि में धकेलना और जयललिता जी से हाथ मिलाना प्रकाश करात साहब को एक नई पटकनी देने वाला ही साबित होने जा रहा है। तामिलनाड में मार्क्सवादी फिल्म निर्माता जेमिनी गनेशन की पुत्री राज्यसभा सदस्य 'रेखा' ,उत्तर-प्रदेश में बसपा-मायावती जी तथा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ मोर्चा बनाना चाहिए था जो कि करात साहब की ज़िद्द के चलते संभव न हो सकता था। 

सी पी एम के समर्थक 'टाईम्स आफ इंडिया' की प्रस्तुति के माध्यम से 'रेखा' को अकर्मण्य सिद्ध कर रहे हैं जिसमें बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में उन्होने 'सांसद निधि' का धन व्यय नहीं किया है। वस्तुतः ऐसा करके 'रेखा'जी ने एक आदर्श ही स्थापित किया है। वह कला-क्षेत्र 'फिल्म' से संबन्धित हैं जहां उनको सरकारी धन लगाने की क्या ज़रूरत थी जिसे अन्य जनोपयोगी कार्यों में व्यय किया  जा सकता है? किन्तु  NGOs चलाने वाले CPM के लोग इसे इसलिए गलत बता रहे हैं कि ऐसा न करके रेखा जी ने IAS अधिकारियों,NGOs संचालकों,सरकारी कर्मचारियों द्वारा 'लूट' किए जाने का मार्ग अवरुद्ध कर दिया है। 


जहां CPM के NGOs संचालक सांसद निधि द्वारा लूट में सहयोगी न होने पर 'रेखा' जी की आलोचना कर रहे हैं वहीं CPI के राष्ट्रीय सचिव कामरेड अतुल कुमार अनजान साहब का कहना है-"देश से भ्रष्टाचार खत्म कराने के लिए सांसद व विधायक निधि का समाप्त होना बहुत ज़रूरी है। "

"राज्येश'बुध' की महादशा मे 12 अगस्त 2010 से 23 फरवरी 2017 तक की अंतर्दशाये भाग्योदय कारक,अनुकूल सुखदायक और उन्नति प्रदान करने वाली हैं। 24 फरवरी 2017 से 29 जून 2017 तक बुध मे 'सूर्य' की अंतर्दशा रहेगी जो लाभदायक राज्योन्नति प्रदान करने वाली होगी।
अभी तक रेखा के किसी भी राजनीतिक रुझान की कोई जानकारी किसी भी माध्यम से प्रकाश मे नहीं आई है ,किन्तु उनकी कुंडली मे प्रबल राज्य-योग हैं। जब ग्रहों के दूसरे परिणाम चरितार्थ हुये हैं तो निश्चित रूप से इस राज्य-योग का भी लाभ मिलना ही चाहिए।"
19 अप्रैल 2012 को इसी ब्लाग में मैंने यह विश्लेषण दिया था और 26 अप्रैल 2012 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जी ने 'रेखा'जी को राज्यसभा सदस्य मनोनीत करने की घोषणा कर दी थी। इस निष्कर्ष को देखते हुये जयललिता जी की अपेक्षा यदि वांम मोर्चा ने 'रेखा जी' को आगे करके तमिल पी एम की कल्पना की होती तो स्थिति लाभप्रद रहती। किन्तु जब ज्योतिष को मानते नहीं तो उसके निष्कर्ष पर कैसे ध्यान दे सकते थे? अब हो सकता है कि इन्दिरा कांग्रेस रेखा को आगे करके लाभ उठा ले।" 

यदि 2014 के चुनावों के बाद 'रेखा' जी अथवा 'ममता' जी की अगुवाई में कांग्रेस एक बार फिर सत्ता पर काबिज होती है तो  इसके लिए प्रकाश करात साहब व उनकी सी पी एम ही उत्तरदाई होगी जिसने 'दीवार पर लिखे को ' न पढ़ने की कसंम  खा रखी है। 


~विजय राजबली माथुर ©
 इस पोस्ट को यहाँ भी पढ़ा जा सकता है।

Sunday, February 23, 2014

चुनावी परिदृश्य में तृणमूल कॉंग्रेस व ममता बनर्जी की स्थिति ---विजय राजबली माथुर


'रेखा जी' के अतिरिक्त एक और महिला( जिनसे वांम मोर्चा नफरत रख रहा है ) ममता बनर्जी का समय भी उनके अनुकूल चल रहा है। रण-नीति का तक़ाज़ा था कि 'गैर भाजापा' और 'गैर कांग्रेस'मोर्चे का नेता ममता जी को स्वीकार करके दोनों को परास्त किया जाता। किन्तु राजनीतिक लाभ को नहीं व्यक्तिगत द्वेष को वरीयता देने से हानि उठानी पड़ सकती है क्योंकि यहाँ भी हो सकता है कि कांग्रेस घोषित न सही तो अघोषित तालमेल ममता जी से बैठा कर लाभदायक स्थिति अपने लिए बना सकती है।



"अखबारी विश्लेषण से अलग मेरा विश्लेषण यह है कि जन्म के बाद ममता जी की 'चंद्र महादशा' 07 वर्ष 08 आठ माह एवं 07 दिन शेष बची थी। इसके अनुसार 03 जूलाई 2010 से वह 'शनि'महादशांतर्गत 'शुक्र' की अंतर्दशा मे 03 सितंबर 2013 तक चलेंगी। यह उनका श्रेष्ठत्तम समय है। इसी मे वह मुख्य मंत्री बनी हैं। 34 वर्ष के मजबूत बामपंथी शासन को उखाड़ने मे वह सफल रही हैं तो यह उनके अपने ग्रह-नक्षत्रों का ही स्पष्ट प्रभाव है।
इसके बाद पुनः 'सूर्य' की शनि मे अंतर्दशा 15 अगस्त 2014 तक उनके लिए अनुकूल रहने वाली है और लोकसभा के चुनाव इसी अवधि के मध्य होंगे। केंद्र (दशम भाव मे )'शनि' उनको 'शश योग' प्रदान कर रहा है जो 'राज योग'ही है।

हाल ही में ममता बनर्जी को अन्ना हज़ारे द्वारा व्यक्त समर्थन से बौखला कर कुछ वामपंथी चिंतकों ने उनको RSS/मोदी समर्थक घोषित कर दिया है जिसका जवाब ममता जी ने इस प्रकार दिया है:

:"ममता ने कहा,किसी भी हाल में मोदी को नहीं दूंगी समर्थन"

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता 


बनर्जी ने भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी को समर्थन 

देने से साफ इनकार कर दिया है। ममता ने कहा कि भाजपा दंगे 

करवाकर सत्ता में आने वाली पार्टी है। एक समाचार पत्र को दिए 

साक्षात्कार में ममता ने कहा कि न भाजपा,कांग्रेस का विकल्प नहीं हो 

सकती और न ही कांग्रेस,भाजपा का विकल्प हो सकती है। हम न तो 

भ्रष्ट सरकार के साथ रह सकते हैं और न ही दंगे करवाने वाली पार्टी के 

साथ जा सकते हैं। ओपिनियन पोल के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस 

आगामी लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ी पार्टी के तौर 

पर उभरेगी।केन्द्र में अगले गठबंधन को आकार देने में तृणमूल कांग्रेस 

बड़ा फैक्टर हो सकती है। खुद के अगले प्रधानमंत्री बनने को लेकर भी 

ममता बनर्जी स्पष्ट नहीं है। तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने कहा कि कई 

नेता हैं जो देश के अच्छे नेता हो सकते हैं। लोकतंत्र और जनता ही तय 

करेगी कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा। ममता ने कहा कि केन्द्र में 

अगली सरकार नया गठबंधन बना सकता है। बकौल ममता,मुझे 


लगता है कि अगर चुनाव के बाद भाजपा और कांग्रेस की सीटों को जोड़कर 



देखेंगे तो आंकड़ा आधे से भी कम होगा। फेडरल फ्रंट ही भविष्य है।

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=664143703631438&set=a.152760088103138.30548.100001074446476&type=1

27 नवंबर 2012 को स्थगित रैली 16 फरवरी 2014 को लखनऊ में  आयोजित करवाकर ममता जी ने संकेत दे दिया है कि यदि मुलायम सिंह प्रकाश करात के फेर में फंसे रहे तो वह  उनके  सहयोग के बगैर ही फेडरल फ्रंट की दिशा में बढ़ सकती हैं।यदि उत्तर-प्रदेश में ममता जी ने मायावती जी से तालमेल बैठा लिया तो यहाँ भी उनको काफी मजबूती मिल जाएगी।  सी पी एम में भाजपा के भगौड़ों को शामिल किए जाने से उसके भविष्य की दिशा का खुलासा हो चुका है। इस सूरत में ममता बनर्जी के तर्क जनता को आसानी से ग्राह्य हो सकते हैं। सी पी एम की शुतुरमुरगी चालें वामपंथ को जोरदार झटका दे सकती हैं। तब 'पाछे पछताए होत क्या? जब चिड़ियाँ चुग गईं खेत' । अभी भी बहुत समय है कि सी पी एम को छोड़ कर समस्त वामपंथ एकजुट होकर  ममता बनर्जी के नेतृत्व में भाजपा/कांग्रेस/आ आ पा  को संयुक्त रूप से चुनावों में परास्त कर सकता है। 

~विजय राजबली माथुर ©
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Thursday, January 23, 2014

सोनिया जी के राजनीतिक कदम क्या हो सकते हैं?---विजय राजबली माथुर

प्रस्तुत हैं 29 मई 2013 और 06 जनवरी 2014 को प्रकाशित  आशुतोष गुप्ता जी के दो आलेख :




जहां मई 2013 के लेख द्वारा आशुतोष जी चेतावनी दे रहे थे कि सोनिया जी के राजनीतिक आंकलन को कम आँकने की गलती न की जाये वहीं सात माह बाद वह खुद उनकी पार्टी को चुनौती देने वाली आ आ पा में शामिल हो गए हैं और अब कह रहे हैं कि यह नई पार्टी सोनिया जी की कांग्रेस के लिए खतरा है क्योंकि "विचार के मामले में यह उसी तरह की पार्टी है। "

2004 में जब इंका के अंदर से सोनिया जी को पी एम बनाए जाने की मांग उठ रही थी और जब उनके विदेशी मूल का होने के कारण तीव्र विरोध भी हो रहा था तब भी उनका इरादा खुद पी एम बनने का था ही नहीं क्योंकि उनके अपने मायके के रिशतेदारों का दबाव उन पर यह दायित्व न लेने का था और आज भी वहीं से राहुल अथवा प्रियंका को यह दायित्व न सौंपने का दबाव है। 

पी एम मनमोहन सिंह जी को 2004 में इसी वजह से मौका मिला था लेकिन 2009 में वह अपनी तिकड़म से दोबारा पी एम बनने में कामयाब हुये थे जबकि इस बार प्रणव मुखर्जी साहब को पी एम बनाया जाना था बीच में भी बदलाव की कोशिशें हुईं किन्तु मनमोहन जी अड़े रहे और सोनिया जी के विदेश इलाज पर जाने के दौरान अपने प्रिय केजरीवाल के जरिये हज़ारे आंदोलन खड़ा करवा दिया जिसकी उपज आ आ पा है। चूंकि अब तीसरी बार स्वास्थ्यगत एवं अलोकप्रियता के कारणों से खुद मनमोहन सिंह जी पी एम नहीं बन सकते तो विकल्प के रूप में अरविंद केजरीवाल को खड़ा करा दिया है जिनको RSS का आंतरिक आशीर्वाद भी हासिल है ।RSS को भी दीख रहा था कि जिस मोदी को वह आगे करके चल रहा है वह बेहद अलोकप्रिय हैं क्योंकि उन पर 2002 के दंगों व जन-संहार के दाग लगे हैं इसलिए खुल कर मोदी का नाम और अंदर से केजरीवाल का समर्थन करना ही RSS की रण-नीति है जिससे भाजपा/RSS विरोधी मतदाता भी भ्रमवश कांग्रेस से रुष्ट होने के कारण आ आ पा व केजरीवाल का समर्थन कर दे। फिलहाल अभी तो संघ अपने इस अभियान में पूर्ण रूप से सफल है क्योंकि कुछ बड़े कम्युनिस्ट नेता भी आ आ पा/केजरीवाल का समर्थन करने लगे हैं। छोटे  लालची कम्युनिस्ट नेता तो केजरी भीड़ में शामिल होकर मंत्री बनने के भी स्वप्न देखने लगे हैं। यदि यही हाल रहा तो जैसे RSS ने 1980 में इंदिराजी व 1984 में राजीव जी का समर्थन किया था उसी प्रकार 2014 में अरविंद केजरीवाल का समर्थन करेगा। इस प्रक्रिया में रहा सहा कम्युनिस्ट आंदोलन बुरी तरह तबाह हो जाएगा। तानाशाही प्रवृति के केजरीवाल संघ के अत्यधिक अनुकूल रहेंगे। 

जैसा कि आशुतोष जी ने मई 2013 में लिखा था कि क्या तीसरी बार भी सोनिया जी को कम आँकने की गलती की जाएगी? सोनिया जी इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी जबकि उनके बनाए वर्तमान पी एम साहब भी उनके विरोधियों को ताकतवर बनाते जा रहे हैं RSS के मंसूबों को ध्वस्त करके मोदी/केजरीवाल को अगला पी एम बनने से रोक सकती हैं यदि  आगामी लोकसभा चुनावों के दौरान जिन  दो महिलाओं के सितारे बुलंद रहेंगे उनको सोनिया जी समर्थन देकर आगे कर दें । ममता जी अलग पार्टी में हैं उनसे उनकी पार्टी सहयोग कर और ले सकती है। लेकिन रेखा जी मनोनीत सांसद हैं उनसे पूरा-पूरा सहयोग उनकी पार्टी ले सकती है। यदि  रेखा जी को आगे किया जाता  हैं तो तमिलनाडू में उनको वैसा ही समर्थन मिल सकता है जैसा आंध्र में नरसिंघाराव जी को मिला था। उत्तर भारत में भी केजरीवाल के प्रति युवा वर्ग का रुझान  अपनी तरफ मोडने में उनको  सफलता मिल जाएगी ।

अपने पूर्व विश्लेषण के  दो लिंक प्रस्तुत  कर रहा हूँ जिनमें  दूसरे लिंक  से स्पष्ट होता है कि वह सत्य सिद्ध हो चुका है - जब 19 अप्रैल 2012 को रेखा जी वाला विश्लेषण दिया था और 26 को रेखा जी सांसद मनोनीत हो गईं थीं ।  :
  • "अखबारी विश्लेषण से अलग मेरा विश्लेषण यह है कि जन्म के बाद ममता जी की 'चंद्र महादशा' 07 वर्ष 08 आठ माह एवं 07 दिन शेष बची थी। इसके अनुसार 03 जूलाई 2010 से वह 'शनि'महादशांतर्गत 'शुक्र' की अंतर्दशा मे 03 सितंबर 2013 तक चलेंगी। यह उनका श्रेष्ठत्तम समय है। इसी मे वह मुख्य मंत्री बनी हैं। 34 वर्ष के मजबूत बामपंथी शासन को उखाड़ने मे वह सफल रही हैं तो यह उनके अपने ग्रह-नक्षत्रों का ही स्पष्ट प्रभाव है।
    इसके बाद पुनः 'सूर्य' की शनि मे अंतर्दशा 15 अगस्त 2014 तक उनके लिए अनुकूल रहने वाली है और लोकसभा के चुनाव इसी अवधि के मध्य होंगे। केंद्र (दशम भाव मे )'शनि' उनको 'शश योग' प्रदान कर रहा है जो 'राज योग' है।"
    http://krantiswar.blogspot.in/2013/08/blog-post.html
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    ."राज्येश'बुध' की महादशा मे 12 अगस्त 2010 से 23 फरवरी 2017 तक की अंतर्दशाये भाग्योदय कारक,अनुकूल सुखदायक और उन्नति प्रदान करने वाली हैं। 24 फरवरी 2017 से 29 जून 2017 तक बुध मे 'सूर्य' की अंतर्दशा रहेगी जो लाभदायक राज्योन्नति प्रदान करने वाली होगी।"
    अभी तक रेखा के किसी भी राजनीतिक रुझान की कोई जानकारी किसी भी माध्यम से प्रकाश मे नहीं आई है ,किन्तु उनकी कुंडली मे प्रबल राज्य-योग हैं। जब ग्रहों के दूसरे परिणाम चरितार्थ हुये हैं तो निश्चित रूप से इस राज्य-योग का भी लाभ मिलना ही चाहिए।
    http://krantiswar.blogspot.in/2012/04/blog-post_19.html 
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 ~विजय राजबली माथुर ©
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Thursday, August 8, 2013

ममता बनर्जी की आसान डगर ---विजय राजबली माथुर

हिंदुस्तान,लखनऊ  -31 जुलाई -पेज 16


शुक्रवार, 19 अक्तूबर 2012

ममता बनर्जी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं ? http://krantiswar.blogspot.in/2012/10/blog-post_19.html

पुराने अखबारों का अवलोकन करते समय सुश्री ममता बनर्जी की यह जन्मपत्री दिखाई दे गई जिसमे सन 2002 तक का उनका भविष्य लेखक ने अपनी थ्यौरी से दिया था। उसके सही-गलत होने की विवेचना मैं नहीं कर रहा हूँ। मैंने विगत विधानसभा चुनावों से पूर्व अपने एक लेख द्वारा ममता जी की कटु राजनीतिक आलोचना भी की थी और पश्चिम बंगाल की जनता से आह्वान भी किया था कि वह ममता जी को सत्तारूढ़ न होने दे। परंतु ममता जी मुख्यमंत्री बनी और बड़ी शान से बनीं। इसलिए भी कौतूहल था उनका भविष्य जानने का और इसलिए भी कि दार्जिलिंग ज़िले के सिलीगुड़ी मे 8वी कक्षा से 10वी बोर्ड की परीक्षा पास करने तक रहने के कारण बंगाल की राजनीति मे दिलचस्पी सदा ही रही है। वहाँ से 10-15 किलोमीटर दूर ही है नक्सल बाड़ी जहां 1967 मे 'नक्सल बाड़ी से नल बाड़ी तक' आंदोलन हमारे रहते ही शुरू हुआ था। इस आंदोलन का सम्पूर्ण लाभ राजस्थान के मारवाड़ियों को हुआ था जिनको इंश्योरेंस क्लेम नुकसान से कहीं बहुत ज़्यादा मिला था। अपनी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर आज भी मैं ममता जी का समर्थक नहीं हूँ,परंतु उनके ग्रह-नक्षत्र जो बोल रहे हैं उनको झुठलाया भी तो नहीं जा सकता। misuse of knowledge भी मैं नहीं कर सकता। अतः ममता जी की कुंडली का वैज्ञानिक निष्पक्ष  विश्लेषण प्रस्तुत करने मे कोई पूर्वाग्रह(IBN7 के प्रतिनिधि ब्लागर एवं उनकी  सहयोगी पूना प्रवासी ब्लागर की भांति जो ज्योतिष को मीठा जहर कहते हैं ) भी नहीं है। 

ममता जी की प्रस्तुत जन्मपत्री के अनुसार उनका जन्म लग्न-मकर है और---

द्वितीय भाव मे कुम्भ का 'मंगल'

पंचम भाव मे वृष का 'चंद्रमा'

षष्ठम भाव मे मिथुन का 'केतू'

सप्तम भाव मे कर्क का 'ब्रहस्पति'

दशम भाव मे तुला का 'शनि'

एकादश भाव मे वृश्चिक का 'शुक्र'

द्वादश भाव मे धनु के 'सूर्य','बुध' और 'राहू'

अखबारी विश्लेषण से अलग मेरा विश्लेषण यह है कि जन्म के बाद ममता जी की 'चंद्र महादशा' 07 वर्ष 08 आठ माह एवं 07 दिन शेष बची थी। इसके अनुसार 03 जूलाई 2010 से वह 'शनि'महादशांतर्गत 'शुक्र' की अंतर्दशा मे 03 सितंबर 2013 तक चलेंगी। यह उनका श्रेष्ठत्तम समय है। इसी मे वह मुख्य मंत्री बनी हैं। 34 वर्ष के मजबूत बामपंथी शासन को उखाड़ने मे वह सफल रही हैं तो यह उनके अपने ग्रह-नक्षत्रों का ही स्पष्ट प्रभाव है। 

इसके बाद पुनः 'सूर्य' की शनि मे  अंतर्दशा 15 अगस्त 2014 तक  उनके लिए अनुकूल रहने वाली है और लोकसभा के चुनाव इसी अवधि के  मध्य होंगे। केंद्र (दशम भाव मे )'शनि' उनको 'शश योग' प्रदान कर रहा है   
जो 'राज योग' है।

ममता जी को समयानुकूल सही बात कहने व उठाने का विलक्षण लाभ भी   उनके ग्रह प्रदान कर रहे हैं और इसी लिए FDI को मुद्दा बना कर उन्होने 'संप्रग-2' से अलगाव कर लिया है। उससे पूर्व राष्ट्रपति चुनावों के दौरान  प्रकट मे मुखर्जी साहब का विरोध करके उनको बामपंथियों के एक गुट -CPM का समर्थन दिला दिया फिर खुद भी उनका समर्थन कर दिया। मुखर्जी साहब ने मुलायम सिंह जी व ममता जी को वेंकट रमन साहब सरीखा आश्वासन दे रखा है जिसके अनुसार कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत न आने पर वह 'तीसरे मोर्चे' को अवसर देंगे।देखें---


शनिवार, 28 जुलाई 2012


नए महामहिम ---केंद्र मे गैर कांग्रेस/भाजपा सरकार का रास्ता साफ

महामहिम प्रणब मुखर्जी साहब की शपथ कुंडली का विश्लेषण भी। 

http://krantiswar.blogspot.in/2012/07/blog-post_28.html 




ममता जी की कुंडली मे 'बुध-आदित्य'योग भी है वह भी 'राज योग' है। षष्ठम भाव का 'केतू' उनके शत्रुओं का संहार करने मे सक्षम है। सप्तम मे उच्च के 'ब्रहस्पति' ने जहां उनको अविवाहित रखा वहीं वह उनकी लग्न को पूर्ण दृष्टि से देखने के कारण 'बुद्धि चातुर्य'प्रदान करते हुये सफलता कारक है। जहां दशम मे उच्च का शनि उनको राजनीति मे सफलता प्रदान कर रहा है वहीं यही शनि पूर्ण दृष्टि से उनके सुख भाव को देखने के कारण सुख मे क्षीणता प्रदान कर रहा है। द्वितीय भाव मे शनि क्षेत्रीय 'मंगल' होने के कारण ही उनकी बात का प्रभाव उनके विरोधियों के लिए 'आग' का काम करता है जबकि यही जनता को उनके पक्ष मे खड़ा कर देता है। 

ममता जी की जन्म कुंडली के मुताबिक उनको निम्न-लिखित पदार्थों का 'दान भूल कर भी नहीं' करना चाहिए। इंनका दान करने पर उनको हानि व पीड़ा ही मिलेगी --

1-  चांदी,मोती,चावल,दही,दूध,घी,शंख,मिश्री,चीनी,कपूर,बांस की बनी चीजें जैसे टोकरी-टोकरा,सफ़ेद स्फटिक,सफ़ेद चन्दन,सफ़ेद वस्त्र,सफ़ेद फूल,मछली आदि।
2-सोना,पुखराज,शहद,चीनी,घी,हल्दी,चने की दाल,धार्मिक पुस्तकें,केसर,नमक,पीला चावल,पीतल और इससे बने बर्तन,पीले वस्त्र,पीले फूल,मोहर-पीतल की,भूमि,छाता आदि। कूवारी कन्याओं को भोजन न कराएं और वृद्ध-जन की सेवा न करें (जिनसे कोई रक्त संबंध न हो उनकी )।किसी भी मंदिर मे और मंदिर के पुजारी को दान नहीं देना चाहिए।


3-सोना,नीलम,उड़द,तिल,सभी प्रकार के तेल विशेष रूप से सरसों का तेल,भैंस,लोहा और स्टील तथा इनसे बने पदार्थ,चमड़ा और इनसे बने पदार्थ जैसे पर्स,चप्पल-जूते,बेल्ट,काली गाय,कुलथी, कंबल,अंडा,मांस,शराब आदि।

अगले माह ममता जी यू पी मे अपनी रैली करने जा रही हैं *और संभावना है कि वह इंदिराजी जैसा आक्रामक रुख अख़्तियार करके जनता को (खास कर जो पहले कांग्रेस समर्थक रही है)  अपने पक्ष मे मोड ले जाएंगी इसका भी लाभ तीसरे मोर्चे को ही मिलेगा क्योंकि मंहगाई से त्रस्त जो जनता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा की ओर मुड़ती उसे ममता जी अपने साथ कर लेंगी। चुनाव बाद तीसरे मोर्चे की सरकार बनने की दशा मे मुलायम सिंह जी व ममता जी मे जिनके ग्रह-नक्षत्र प्रबल होंगे वही अगले प्रधानमंत्री होंगे। फिलहाल ममता जी की कुंडली मे राज योग और उनके अनुकूल समय को देखते हुये उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। ज्योतिष को मीठा जहर बताने वाले IBN7 के कार्पोरेटी दलाल अवश्य ही ममता जी को पी एम बनने से रोकने की गंभीर साजिश करेंगे ,अब देखना है कि वे अपने मीठे जहर का प्रयोग कितना और कैसे करते हैं?



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* परंतु मुलायम सिंह जी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री किरमय नंदा जी के द्वारा ममता जी को रैली रद्द करने पर राजी कर लिया था और वह रैली न हो सकी। इधर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्णयों के कारण उनकी पार्टी का जन-समर्थन निरंतर ह्रासवान है जबकि पूर्व में दिये गए विश्लेषण के अनुसार ममता जी को जनता का भरपूर समर्थन आज भी प्राप्त है। आज भी वा-पंथ ममता जी को समर्थन देने की बजाए मुलायम सिंह जी के प्रति झुकाव रखता दीख रहा है। इस प्रकार वाम-पंथ जनता का समर्थन एक बार फिर प्राप्त करने से वंचित हो जाएगा। ममता जी के अनुकूल ग्रह उनका मार्ग सुगम कर देंगे। चूंकि ममता जी उत्तर प्रदेश की जनता से संपर्क बनाने से वंचित कर दी गई हैं तो उसका सीधा-सीधा लाभ सोनिया जी की कांग्रेस को मिल जाएगा और वह भी परिस्थितियों के अनुरूप ममता जी का समर्थन करने पर विवश हो सकती है।

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