Friday, September 25, 2026

स्वतंत्र पत्रकारिता में रितिका चोपड़ा (Ritika Chopra) का प्रेरणादायक योगदान Keshaw Bhatter's Post

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कुछ पोस्ट्स देखी जिनमे रीतिका चोपड़ा को कॉन्ग्रेसी एजेंट बताते हुए अपशब्द कहे गए हैं। दरअसल 23.09.2026 के ' द इंडियन एक्स्प्रेस' में छपी भारत के चुनाव आयोग की अंदरूनी स्टोरी ने देश भर में हलचल मचा दी है। यह बात कुछ लोगों को कुछ ज्यादा ही परेशान कर रही है। बस!  इस पोस्ट को लिखने की भूमिका बन गई। और हाँ- 'शाबाश !'  
पत्रकारिता में निष्पक्षता, साहस और गहराई की एक मिसाल! 
रितिका चोपड़ा (Ritika Chopra), जिन्हें 19 वर्षों से अधिक का एक शानदार पत्रकारिता अनुभव है, वर्तमान में The Indian Express, Mumbai की Resident Editor के रूप में अपनी भूमिका निभा रही हैं।
राजनीति, शासन और शिक्षा नीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उनकी पकड़ बेजोड़ है। अपने करियर के दौरान उन्होंने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और शिक्षा मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर ऐसी खोजी रिपोर्ट्स तैयार की हैं, जिन्होंने सरकार और प्रशासन को जवाबदेह ठहराया है।
एक नज़र उनके प्रेरणादायक सफर और उपलब्धियों पर:
प्रमुख सम्मान एवं पुरस्कार:
चमेली देवी जैन अवॉर्ड (2024): खोजी पत्रकारिता और स्वतंत्र संस्थाओं की स्थिति उजागर करने के लिए 'आउटस्टैंडिंग वुमन मीडिया पर्सन ऑफ द ईयर'।
रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवॉर्ड (2021): चुनाव आयोग के कामकाज पर की गई बेहतरीन सीरीज़ के लिए।
IPI इंडिया अवॉर्ड (2022): 2019 के लोकसभा चुनावों के निष्पक्ष और साहसिक कवरेज के लिए।
UNFPA-लाडली मीडिया अवॉर्ड (2018) एवं ACJ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म स्पेशल मेंशन (2018) ("डीवैल्यूएड डिग्री" सीरीज़ के लिए)।
शिक्षा और करियर की शुरुआत:
उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से मास कम्यूनिकेशन में डिग्री हासिल की। 2006 में 'हिंदुस्तान टाइम्स' से इंटर्नशिप के रूप में शुरू हुआ यह सफर 'द इकोनॉमिक टाइम्स' और 'मेल टुडे' जैसे प्रमुख संस्थानों से होते हुए आज पत्रकारिता के एक नए शिखर पर है।
सच्चाई को सामने लाने और स्वतंत्र पत्रकारिता की साख को बनाए रखने के लिए उनका योगदान प्रेरणादायक है! 

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  ~विजय राजबली माथुर ©

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