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Friday, April 12, 2019

हमारे लोकतंत्र को बचाएं ------ राम हर्ष पटेल


Ram Harsh Patel
9 mins
*मोदी का पूरा रिपोर्ट कार्ड *  :

आप यह देखकर चौंक जाएंगे कि पिछले 5 वर्षों में भारत कैसे बदल गया है, इसमे अगर कुछ भी गलत लगे तो बताएं...अन्यथा इस सच को स्वीकार करें..

*1* भारत अब उच्चतम बेरोजगारी दर से पीड़ित है *(NSSO डेटा)*

*2* दुनिया के सभी शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहर अब भारत में हैं *(WHO डेटा)*

*3* भारतीय सैनिकों की शहीद की संख्या 30 वर्षों में सबसे अधिक है *(वाशिंगटन पोस्ट)*

*4* भारत में अब 80 वर्षों में सबसे अधिक आय असमानता है *(क्रेडिट सुइस रिपोर्ट)*

*5* भारत महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खराब देश बन गया है *(थॉमस रॉयटर्स सर्वे)*

*6* उग्रवाद में शामिल होने वाले कश्मीरी युवा इन वर्षों में सबसे ज्यादा हैं *(भारतीय सेना के आंकड़े)*

*7*.इस बार भारतीयों किसानों को पिछले 18 साल में सबसे खराब कीमत का सामना करना पड़ा *(WPI डेटा)*

*8* मोदी के पीएम बनने के बाद अब तक की सबसे ज्यादा गाय से जुड़ी हिंसा और रिकॉर्ड पर मॉबलिंचिंग की घटनाएं हुई *(इंडिया स्पेंड डेटा)*

*9* भारत अब विश्व का दूसरा सबसे असमान देश है *(ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट)*

*10* भारतीय रुपया अब एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्रा *(मार्केट डेटा)* है

*11* भारत पर्यावरण संरक्षण में विश्व का तीसरा सबसे बुरा देश बन गया है *(EPI 2018)*

*12* भारत के इतिहास में पहली बार विदेशी धन और भ्रष्टाचार को वैध बनाया गया है *(वित्त विधेयक २०१ in)*

*13* हमारे वर्तमान प्रधान मंत्री 70 वर्षों में कम से कम जवाबदेह प्रधानमंत्री हैं *(प्रथम पीएम 0 प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए)*

*14* भारत के इतिहास में पहली बार, CBI बनाम CBI, RBI बनाम Govt, SC बनाम Govt के झगड़े इसलिए हुए क्योंकि मोदी सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर नियंत्रण चाहते थे

*15* भारत के इतिहास में पहली बार, सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ”लोकतंत्र खतरे में है, हमें काम नही करने दिया जा रहा”

*16*. भारत के इतिहास में पहली बार, रक्षा मंत्रालय कार्यालय से चोरी हुए शीर्ष गुप्त रक्षा दस्तावेज (राफेल)

*17*.पिछले 70 सालों में असहिष्णुता और धार्मिक अतिवाद सबसे ज्यादा है *(व्यक्तिगत अवलोकन क्योंकि इसके लिए कोई डेटा मौजूद नहीं है )*

*18.भारतीय मीडिया अब तक के वर्षों में सबसे खराब है *(व्यक्तिगत अवलोकन)*

*19*.भारत के इतिहास में पहली बार, अगर आप मोदी सरकार की आलोचना करते हैं, तो आप पर देशद्रोही का लेबल लगता हे जो की बहुत शर्मनाक है

इस संदेश में जो कुछ भी कहा गया है वह जुमला नहीं है। ऊपर दिया गया सभी डेटा 100% सत्यापित फैक्ट्स  है। आप किसी भी बिंदु पर एक Google खोज करके उन्हें स्वयं सत्यापित कर सकते हैं। हमारे भारत के साथ जो हुआ है उसकी वास्तविकता यही है।

मोदी सरकार पिछले 70 वर्षों में सबसे खराब भारत सरकार है।

कुछ लोग कहते हैं कि 2019 का चुनाव भारत में होने वाला आखिरी चुनाव होगा। क्योंकि अगर मोदी इस बार जीतते हैं, तो वह हमारे लोकतंत्र के सभी संस्थानों को नियंत्रित करना चाहते हैं और एक तानाशाह बन जाएंगे। आज *"चोर" और "चौकीदार" की बहस के बीच रोज़ी-रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भ्रष्टाचार, कालाधन, नोटबंदी, रोजगार, महंगाई आदि सभी मुद्दें उड़न छू हो गये।

लेकिन ये तय है कि जब देश को बर्बाद करने वालों की सूची तैयार होगी तब इन दो वर्गों का नाम सबसे ऊपर होगा
1.बिकाऊ मीडिया
2. मूर्ख अंधभक्त

*इस सरकार की सुखद बात यही रही कि नाली से गैस, बतख से ऑक्सीजन, गोबर से कोहिनूर, रोजगार में पकौड़े इतनी मनोरंजक सरकार थी कि 5 साल कैसे कट गये पता ही नहीं चला..*

डरें मत, इस संदेश को साझा करें।

हमारे लोकतंत्र को बचाएं।

https://www.facebook.com/ramharsh.patel/posts/2087640334685472
~विजय राजबली माथुर ©

Thursday, June 21, 2018

कोई 'योग' बिचारा भला क्या ? ------ मालविका हरिओम


Malvika Hariom
जिस देश में शिक्षा का स्तर इतना अद्भुत हो कि धर्म के नाम पर आसानी से, फिर चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान, एक-दूसरे को जान से मारा जा सकता हो, जहाँ अभिभावक इतने समझदार हों कि अपने ही बच्चों के स्कूल के सामने, बड़ी-बड़ी गाड़ियों में सवार, एक-दूसरे पर ज़ोर-ज़ोर से हॉर्न मारते-फेंकते हों, इस बात से बेपरवाह कि उनका अपना बच्चा भी इस शोर से उपजे प्रदूषण का शिकार हो रहा है, जिस देश में ख़ुद के रहने की जगह भले ही न बची हो लेकिन सदियों पुराना, बड़े से बड़ा कबाड़ भी लोग दिल से चिपका कर रखते हों, जहाँ सड़कों पर ख़ुद के चलने की जगह भले ही न बची हो लेकिन तमाम कंडम और कूड़ा गाड़ियाँ आस-पास मुस्कुराती, चिढ़ाती, जगह घेरे खड़ी नज़र आ जाती हों, जिस देश में कोई ख़ुद से एक भी पौधा न लगाता हो लेकिन बड़ी शान के साथ अपनी अलग-अलग क़िस्म की, ढेरों धुआँ उगलती गाड़ियों में बैठकर, बड़े अधिकार के साथ वातावरण को अशांत और प्रदूषित करने की भरपूर सामर्थ्य रखता हो, जिस देश में एक हज़ार का एक पिज़्ज़ा खा जाने वाले लोग भी घर में काम करने वाले की तनख़्वाह और रिक्शे वाले, सब्ज़ी वाले के साथ एक-एक पैसे की हुज्जत से बाज़ न आते हों, जहाँ आज भी दूरदर्शन वालों को सिखाना पड़ता हो कि हाथों को साबुन से धोना कितना ज़रूरी है, जहाँ राह चलते साफ-सुथरी सड़क पर चाट के पत्तल को हवा में उड़ा देना लोग अपनी शान समझते हों, जिस देश में नदियों का पानी, जिस पानी के बिना आप जीवित नहीं रह सकते, वह पानी स्वयं आपके अत्यधिक कूड़े-कचरे से भयभीय अपने ख़ुद के जीवन की भीख माँगता फिरता हो, जिस देश में अमीर-ग़रीब के बीच की खाई ऐसी हो कि अमीर 'अ से आसमान' पर रहता हो और ग़रीब 'ग से गर्त' में.... एक राजा जैसा और दूसरा उस राजा के लिए सुविधाएँ उत्पन्न करने वाली एक मशीन या साधन जैसा, जिस देश में सड़कों और यातायात का हाल ऐसा हो कि लोग बीमारी से ज़्यादा एक्सीडेंट्स में मरने लगें, जिस देश में बेहतर मेडिकल सुविधाओं का लगभग अकाल-अभाव हो, जिस देश में बेकारी, बेरोज़गारी इतनी हो कि लोग खाली बैठे केवल विध्वंसात्मक गतिविधियों का ही ताना-बाना बुनते हों, जहाँ घर के बूढ़े-बुज़ुर्गों के आशीर्वाद से ज़्यादा लोगों की आस्था बाबाओं के ढोंग और चमत्कारों में हो, जिस देश में बढ़ती आबादी का आलम उसके ज़र्रे- ज़र्रे को लील जाने को बेताब दिखता हो, जिस देश के लोग शारीरिक से ज़्यादा मानसिक बीमारियों के शिकार हों, जिस देश में एक लड़की को छेड़ना, उसका बलात्कार कर देना सबसे बड़ा मनोरंजन हो, जहाँ न्याय व्यवस्था सिरे से चरमरा चुकी हो, जहाँ सुरक्षा करने वाली पुलिस से लोग ख़ुद को सबसे ज़्यादा असुरक्षित महसूस करने लगे हों, जिस देश की आबादी के लगभग अस्सी प्रतिशत ने, जो कि किसान और मज़दूर हैं, दिन भर की मज़दूरी और उससे मिलने वाली दिहाड़ी के अलावा कभी कोई दूसरा सपना पालने की हिम्मत तक ना की हो, जिस देश का मीडिया इंसान मात्र के कष्ट-दुखों से ज़्यादा हर दिन, एक बिकने वाली ख़बर की तलाश में रहता हो और जिस देश की राजनीति हर मुद्दे में सिर्फ़ और सिर्फ़, राजनीति तलाशती हो, 
ऐसे में, इस देश का और यहाँ के लोगों का, कोई 'योग' बिचारा भला क्या बना या उखाड़ लेगा......

योग-दिवस पर आज इतना ही..
साभार : 
https://www.facebook.com/malvika.hariom/posts/1805574059465422
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( योग का तात्पर्य दो या अधिक का समन्वय अर्थात यह जोड़ने की प्रक्रिया है - तोड़ने की नहीं, न ही यह वर्जिश या कसरत है । आत्मा का परमात्मा से समन्वय होना योग है न कि, सरकारी तामझाम द्वारा व्यापार जगत को लाभ पहुंचाना। इस लेख से यही ध्वनित हो रहा है ------ )
 ~विजय राजबली माथुर ©
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