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Wednesday, April 8, 2026

भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त का बम ------ विजय राजबली माथुर

आज ०८ अप्रैल है -वह दिन जब केन्द्रीय असेम्बली में सरदार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने बम फेंका था.वह बम गूंगी -बहरी सरकार और क़ानून निर्माताओं को जगाने के लिए फेंका गया था किसी हिंसक इरादे से नहीं.न ही किसी की जान ही गई थी. २६ जनवरी १९३० को बांटे गए पर्चे में भगत सिंह ने कहा था-"एक क्रांतिकारी सबसे अधिक तर्क में विशवास करता है.वह केवल तर्क और तर्क में ही विशवास करता है.किसी प्रकार का गाली-गलौच या निन्दा,चाहे वह ऊंचे से ऊंचे स्तर से की गई हो,उसे अपने निश्चित उद्देश्य -प्राप्ति से वंचित नहीं कर सकती.यह सोचना कि यदि जनता का सहयोग न मिला या उसके कार्य की प्रशंसा न की गई तो वह अपने उद्देश्य को छोड़ देगा ,निरी मूर्खता है."



लोअर कोर्ट के जवाब में उन्होंने कहा था क्रान्ति से हमारा अभिप्राय है-अन्याय पर आधारित मौजूदा समाज -व्यवस्था में आमूल परिवर्तन."समाज का प्रमुख अंग होते हुए भी आज मजदूरों को उनके प्राथमिक अधिकार से वंचित रखा जा रहा है और उनकी गाढी कमाई का सारा धन शोषक पूंजीपति हड़प जाते हैं.दूसरों के अन्नदाता किसान आज अपने परिवार सहित दाने-दाने के लिए मोहताज हैं.दुनिया भर के बाजारों को कपड़ा मुहैय्या करने वाला बुनकर अपने तथा अपने बच्चों के तन ढंकने -भर को भी कपडा नहीं पा रहा है.सुन्दर महलों का निर्माण करने वाले राजगीर,लोहार तथा बढ़ई स्वंय गंदे बाड़ों में रह कर ही अपनी   जीवन-लीला समाप्त कर जाते हैं.इसके विपरीत समाज के जोंक शोषक पूंजीपति जरा-जरा सी बातों के लिए लाखों का वार-न्यारा कर देते हैं.........स्पष्ट है कि आज का धनिक समाज एक भयानक ज्वालामुखी के मुख पर बैठ कर रंगरेलियां मना रहा है शोषकों के मासूम बच्चे तथा करोड़ों शोषित लोग एक भयानक खड्ड की कगार पर चल पड़े हैं."


आज भी जो शासन-व्यवस्था है वह भगत सिंह आदि क्रांतिकारियों के सपनों का स्वराज्य नहीं है.उनका कथन है-"क्रांतिकारियों का विशवास है कि देश को क्रान्ति से ही स्वतंत्रता मिलेगी.वे जिस क्रान्ति के लिए प्रयत्नशील हैं और जिस क्रान्ति का रूप उनके सामने स्पष्ट है उसका अर्थ केवल यह नहीं है कि विदेशी शासकों तथा उनके पिट्ठुओं से क्रांतिकारियों का सशस्त्र संघर्ष हो ,बल्कि इस सशस्त्र संघर्ष के साथ -साथ नवीन सामाजिक व्यवस्था के द्वार देश के लिए मुक्त हो जाएँ.क्रान्ति पूंजीवाद,वर्गवाद तथा कुछ लोगों को ही विशेषाधिकार दिलाने वाली ओरानाली का अंत कर देगी.यह राष्ट्र को अपने पैरों पर खड़ा करेगी,उससे नवीन राष्ट्र और नए समाज का जन्म होगा.क्रान्ति से सबसे बड़ी बात तो यह होगी कि वह मजदूर तथा किसानों का राज्य कायम कर उन सब सामजिक अवांछित तत्वों को समाप्त कर देगी जो देश की राजनीतिक शक्ति को हथियाए बैठे हैं."


आप खुद ही तुलना करें क्या हमें जो आजादी मिली है वह वैसी ही है जिसके लिए भगत सिंह ,बटुकेश्वर दत्त,अशफाक उल्ला खाँ,राम प्रसाद बिस्मिल ,चन्द्र शेखार आजाद आदि असंख्य क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान दिया था.यदि नहीं तो उसे प्राप्त करने में आप क्या योगदान देंगें?

  ~विजय राजबली माथुर ©